नई दिल्ली, 31 जुलाई (वेब वार्ता)। संसद में परीक्षा सुधार से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान गौमूत्र को लेकर की गई टिप्पणी पर सियासी विवाद गहरा गया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी द्वारा उच्चस्तरीय समिति के सदस्य प्रोफेसर वी कामकोटि पर की गई टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। राज्यसभा में भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि गौमूत्र के औषधीय गुणों और जैव प्रभाववर्धक के रूप में उपयोग से जुड़े पेटेंट अमेरिका में भी दर्ज हैं।
राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, लेकिन विपक्ष ने इस विषय से हटकर गौमूत्र को राजनीतिक विवाद का मुद्दा बना दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक विषयों पर बिना तथ्यों के टिप्पणी करना उचित नहीं है।
भाजपा सांसद ने दावा किया कि गौमूत्र के जीवाणुरोधी और कवकरोधी गुणों से संबंधित एक अमेरिकी पेटेंट का क्रमांक 6410059 है, जबकि जैव प्रभाववर्धक के रूप में इसके उपयोग से संबंधित एक अन्य पेटेंट का क्रमांक 6896907 है। उन्होंने कहा कि यदि देश में पारंपरिक ज्ञान के प्रति समय रहते पर्याप्त वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया गया होता, तो हल्दी, तुलसी और नीम जैसे विषयों पर पेटेंट को लेकर भारत को संघर्ष नहीं करना पड़ता।
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर पश्चिमी वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अंधानुकरण करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय परंपराओं और ज्ञान प्रणाली का उचित सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने भाषण में कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक प्रहार भी किया।
क्या था प्रियंका गांधी का बयान
लोकसभा में परीक्षा सुधार से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने उच्चस्तरीय समिति के गठन पर सवाल उठाते हुए कहा था कि समिति में ऐसे सदस्य भी शामिल हैं जिन्हें उन्होंने “गौमूत्र विशेषज्ञ” बताया। उनका यह बयान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास के प्रोफेसर वी कामकोटि के संदर्भ में माना गया।
प्रियंका गांधी के इस बयान का सत्ता पक्ष के सांसदों ने सदन के भीतर विरोध किया और उनसे सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगने की मांग की। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस विषय पर क्षमा याचना नहीं की गई।
शिक्षाविदों ने भी जताई आपत्ति
इस विवाद के बीच देशभर के कुलपतियों, पूर्व कुलपतियों और शिक्षाविदों सहित 215 शिक्षाविदों ने प्रियंका गांधी को एक खुला पत्र लिखकर उनके बयान पर आपत्ति जताई। पत्र में कहा गया कि लोकतंत्र में असहमति का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन किसी शिक्षाविद या वैज्ञानिक का व्यक्तिगत उपहास करना स्वस्थ और तथ्याधारित सार्वजनिक विमर्श के अनुकूल नहीं है।
पत्र में यह भी कहा गया कि वैज्ञानिक विषयों पर चर्चा तथ्यों और अनुसंधान के आधार पर होनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत टिप्पणियों के आधार पर।
राजनीतिक विवाद जारी
गौमूत्र संबंधी टिप्पणी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है। एक ओर भाजपा इसे भारतीय ज्ञान परंपरा और वैज्ञानिक शोध से जुड़ा विषय बता रही है, वहीं विपक्ष परीक्षा सुधार और समिति के गठन को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। इस पूरे विवाद के बीच अभी तक प्रियंका गांधी की ओर से शिक्षाविदों के खुले पत्र पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।




