राष्ट्रीयपेपर लीक पर सख्त कानून पारित, प्रधानमंत्री नरेंद्र...

पेपर लीक पर सख्त कानून पारित, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले- दोषियों को नहीं मिलेगी राहत

नई दिल्ली, 31 जुलाई (वेब वार्ता)। देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और सुरक्षित बनाने की दिशा में संसद से महत्वपूर्ण विधेयक पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले पेपर लीक गिरोहों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा और सरकार परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सामाजिक माध्यम पर जारी अपने संदेश में कहा कि सरकार विश्व स्तरीय परीक्षा व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से निरंतर सुधार कर रही है। इसके लिए विशेषज्ञ कार्यबल का गठन, त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था तथा राज्यों से प्राप्त सुझावों को भी नीति निर्माण में शामिल किया जा रहा है। उनका कहना था कि पिछले कई दशकों से केंद्र और राज्यों की विभिन्न परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे लाखों विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

उन्होंने कहा कि समय की मांग को देखते हुए शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार और आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग आवश्यक हो गया था। इसी उद्देश्य से सरकार ने कठोर कानून बनाने का निर्णय लिया, ताकि परीक्षा में अनियमितताओं और संगठित अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोहराया कि सरकार ने देशवासियों से इस संबंध में कठोर कानून लाने का वादा किया था, जिसे अब संसद ने पूरा कर दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नए प्रावधानों से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को निष्पक्ष अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने सभी नागरिकों से विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए सामूहिक प्रयास करने का भी आह्वान किया।

संसद से मिली विधेयक को मंजूरी

राज्यसभा ने गुरुवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे एक दिन पहले लोकसभा भी इस विधेयक को अपनी मंजूरी दे चुकी थी। दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब यह विधेयक कानून बनने की प्रक्रिया की ओर बढ़ गया है।

विधेयक में प्रश्नपत्र लीक करने, परीक्षा प्रक्रिया में संगठित अनियमितता फैलाने तथा अन्य गंभीर कदाचार के मामलों में दस वर्ष तक के कारावास और पचास लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यह कानून राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक प्रकरण के बाद परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।

कई प्रमुख परीक्षाएं होंगी कानून के दायरे में

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में चर्चा का उत्तर देते हुए कहा कि यह विधेयक केवल प्रश्नपत्र लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा से जुड़े विभिन्न प्रकार के कदाचार को भी अपने दायरे में लाता है। उन्होंने बताया कि यह कानून केवल राष्ट्रीय परीक्षा अभिकरण द्वारा आयोजित परीक्षाओं पर ही नहीं, बल्कि संघ लोक सेवा आयोग, रेल सेवाओं, बैंकिंग सेवाओं सहित अनेक प्रमुख सार्वजनिक परीक्षाओं पर भी लागू होगा।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों से जुड़ा यह विषय देश के प्रत्येक परिवार और अभिभावक के हितों से जुड़ा हुआ है। यदि युवाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था मिलेगी, तभी विकसित भारत का लक्ष्य सशक्त रूप से आगे बढ़ सकेगा।

विपक्ष के संशोधन प्रस्ताव खारिज

विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने कई संशोधन प्रस्ताव प्रस्तुत किए, जिन्हें सदन ने ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया। चर्चा के दौरान कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन भी किया। इस पर सदन के नेता श्री नड्डा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उसके पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है और उसका व्यवहार इसी का प्रमाण है।

सरकार का कहना है कि नया कानून परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने, संगठित अपराध पर रोक लगाने तथा विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -

More articles

- Advertisement -
- Advertisement -