पुतिन ने रखा ब्रिक्स निवेश मंच बनाने का प्रस्ताव, व्यापार और प्रौद्योगिकी पर जोर

नई दिल्ली, 12 सितंबर (वेब वार्ता)। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार, आधारभूत ढांचे, परिवहन-लॉजिस्टिक्स और प्रौद्योगिकी से जुड़ी परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए नया निवेश मंच बनाने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि इस मंच का आधार न्यू डेवलपमेंट बैंक हो सकता है और इसका उद्देश्य निजी क्षेत्र से वित्त जुटाकर ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना होगा।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले सदस्य देशों के उद्योग प्रमुखों की बैठक को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच बढ़ता आर्थिक सहयोग किसी देश के विरुद्ध नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संगठन के अन्य सदस्य देश भी प्रस्तावित निवेश मंच का समर्थन करेंगे। उनके मुताबिक, इस पहल से बड़े पैमाने की विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने में मदद मिल सकती है।

बड़े बुनियादी ढांचा गलियारों पर सहयोग की तैयारी

पुतिन ने कहा कि रूस आर्कटिक परिवहन गलियारे और उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे सहित प्रमुख बुनियादी ढांचा तथा लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं पर साझेदार देशों के साथ काम करने के लिए तैयार है। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक संपर्क और परिवहन सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि संगठन के भीतर आर्थिक सहयोग को केवल व्यापार तक सीमित रखने के बजाय आधारभूत ढांचे, वित्त और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक बनाया जाना चाहिए। इससे सदस्य देशों के बीच आर्थिक संपर्क और निवेश के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स की बढ़ती हिस्सेदारी का दावा

पुतिन ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में ब्रिक्स देशों का योगदान 40 प्रतिशत से अधिक रहा है, जबकि जी-7 देशों की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत रही। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी अवधि में वैश्विक आर्थिक वृद्धि में ब्रिक्स देशों का योगदान आधे से अधिक रहा है।

उन्होंने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था में पारंपरिक विकास केंद्रों के स्थान पर नए केंद्र उभर रहे हैं। पुतिन के अनुसार, ब्रिक्स का आर्थिक सहयोग दूसरे देशों को बाहर करने की नीति पर आधारित नहीं है, बल्कि सदस्य देशों के राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने और व्यापक वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

उन्होंने सरकारों, कारोबार और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को नवाचार और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, ब्रिक्स देश अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और उपलब्ध क्षमताओं के आधार पर वैश्विक आर्थिक वृद्धि में योगदान देने वाला मजबूत मंच तैयार कर रहे हैं।

महिंद्रा सहित कई कंपनियों का दिया उदाहरण

पुतिन ने भारत की कंपनी महिंद्रा को ब्रिक्स देशों के बीच कारोबारी सफलता के उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया। उन्होंने चीन की हुआवेई, ब्राजील की एम्ब्रेयर, संयुक्त अरब अमीरात की टीपीओ और रूस की रोसाटॉम के साथ महिंद्रा द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि इन कंपनियों की सफलता ब्रिक्स देशों के बड़े घरेलू बाजार, तेजी से हो रहे शहरीकरण और बढ़ती तकनीकी क्षमताओं को दर्शाती है। उनके अनुसार, इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश की संभावनाएं और व्यापक हो सकती हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल प्रौद्योगिकी पर जोर

रूस भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियों, डिजिटल मंचों और वित्तीय प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा दे रहा है। पुतिन ने कहा कि रूस इन क्षेत्रों में बड़े स्तर पर काम कर रहा है और ब्रिक्स के भीतर तकनीकी सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

उन्होंने रूस या ब्रिक्स के आर्थिक रूप से अलग-थलग होने की धारणा को खारिज करते हुए कहा कि रूस मौजूदा और नए, दोनों प्रकार के साझेदारों के साथ सहयोग के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स दुनिया के साथ व्यापक आर्थिक और तकनीकी सहयोग के लिए खुला है।

प्रतिबंधों को लेकर पश्चिमी देशों पर निशाना

पुतिन ने पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और अन्य आर्थिक पाबंदियों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेजी से ऐसे रूप ले रही है, जिनमें व्यापार प्रतिबंध, परिवहन मार्गों पर दबाव और द्वितीयक प्रतिबंध शामिल हैं।

रूसी राष्ट्रपति ने दावा किया कि रूस को 30,000 से अधिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि रूस ने विदेशी व्यापार का दायरा बदलकर और अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाकर इन चुनौतियों का सामना किया है।

पुतिन ने ब्रिक्स व्यापार परिषद की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, परिषद व्यापार और आर्थिक संबंधों को नई गति देने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स, वित्त और प्रौद्योगिकी से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है। प्रस्तावित निवेश मंच इसी व्यापक आर्थिक सहयोग को वित्तीय आधार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हो सकता है।

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