नई दिल्ली, 10 सितंबर (वेब वार्ता)। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आ रहे हैं। नई दिल्ली में 12 सितंबर को प्रस्तावित ब्रिक्स नेताओं की बैठक से पहले 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने दोनों नेताओं की मुलाकात की पुष्टि करते हुए कहा है कि रूस भारत को अपना रणनीतिक साझेदार मानता है और दोनों देशों के संबंध उसके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
पेस्कोव के अनुसार, मोदी और पुतिन के बीच होने वाली वार्ता में द्विपक्षीय व्यापार, आर्थिक सहयोग, परिवहन संपर्क तथा दोनों देशों के बीच कारोबारी गतिविधियों को बढ़ाने से जुड़े विषय प्रमुखता से शामिल होंगे। दोनों पक्ष अपनी-अपनी कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर तलाशने और आर्थिक संबंधों को और व्यापक बनाने के उपायों पर भी चर्चा कर सकते हैं।
व्यापार और आर्थिक सहयोग पर रहेगा जोर
भारत और रूस के बीच लंबे समय से व्यापक आर्थिक एवं व्यापारिक संबंध रहे हैं। दोनों देश ऊर्जा, औद्योगिक सहयोग, परिवहन, प्रौद्योगिकी और रक्षा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग करते हैं। आगामी वार्ता में दोनों पक्ष द्विपक्षीय व्यापार को अधिक संतुलित बनाने तथा नए क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार कर सकते हैं।
परिवहन संपर्क भी बैठक के महत्वपूर्ण विषयों में शामिल रहने की संभावना है। दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही को सुगम बनाने तथा व्यापारिक संपर्क मजबूत करने से संबंधित मुद्दों पर चर्चा से आर्थिक संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भी हो सकती है चर्चा
मोदी और पुतिन की बैठक में रूस-यूक्रेन संघर्ष का मुद्दा भी उठ सकता है। दोनों नेता संघर्ष की वर्तमान स्थिति तथा इसके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पड़ रहे प्रभावों पर विचार-विमर्श कर सकते हैं। भारत लगातार संवाद और कूटनीति के माध्यम से विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर जोर देता रहा है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष का प्रभाव ऊर्जा, खाद्य आपूर्ति, व्यापार और वैश्विक आर्थिक स्थिरता सहित कई क्षेत्रों पर पड़ा है। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे से जुड़े व्यापक अंतरराष्ट्रीय प्रभावों पर विचार किए जाने की संभावना है।
फारस की खाड़ी के तनाव पर भी नजर
बैठक के दौरान फारस की खाड़ी में जारी तनाव पर भी बातचीत होने की संभावना है। रूस का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में होने वाली घटनाओं का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में दोनों नेता क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति के साथ-साथ ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर भी चर्चा कर सकते हैं।
भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े घटनाक्रमों पर दोनों देशों के बीच विचारों का आदान-प्रदान अहम माना जा रहा है।
एसयू-57 लड़ाकू विमान पर भी होगी बातचीत
रक्षा सहयोग भी मोदी-पुतिन वार्ता का महत्वपूर्ण हिस्सा रहने की संभावना है। रूस भारत को अपने एसयू-57 लड़ाकू विमान की पेशकश के मुद्दे को बातचीत में उठा सकता है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के मुताबिक, भारत को एसयू-57 उपलब्ध कराने का विषय रूस के एजेंडे में शामिल है।
एसयू-57 रूस का पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जिसे आधुनिक युद्धक क्षमताओं से लैस किया गया है। इसमें कम दृश्यता वाली तकनीक, उन्नत रडार और संवेदक प्रणाली जैसी विशेषताएं बताई जाती हैं। विमान को हवाई तथा जमीनी लक्ष्यों के विरुद्ध अभियान के लिए विकसित किया गया है।
भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग कई दशकों पुराना है। दोनों देश ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र सहित विभिन्न रक्षा परियोजनाओं में सहयोग करते रहे हैं। ऐसे में एसयू-57 की संभावित पेशकश को दोनों देशों के रक्षा संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ब्रिक्स बैठक से पहले अहम मुलाकात
12 सितंबर को होने वाली ब्रिक्स नेताओं की बैठक से ठीक पहले मोदी और पुतिन की द्विपक्षीय मुलाकात को भारत-रूस संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बैठक के दौरान दोनों नेता मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के साथ-साथ द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने की प्राथमिकताओं पर व्यापक चर्चा कर सकते हैं।
पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक और सामरिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच होने वाली वार्ता से व्यापार, आर्थिक सहयोग, रक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में भविष्य की दिशा तय होने की उम्मीद है।




