भुवनेश्वर, 31 जुलाई (वेब वार्ता)। देश में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर चल रही बहस के बीच ओडिशा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की स्नातकोत्तर चिकित्सा परीक्षा से जुड़ा एक नया विवाद सामने आया है। परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र की तस्वीरें सामाजिक माध्यम और संदेश साझा करने वाले समूहों में प्रसारित होने के दावों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही आगामी परीक्षाओं के लिए सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
यह मामला 27 जुलाई को आयोजित वर्ष 2023-26 बैच के एमएस और एमडी पाठ्यक्रम के सामान्य शल्य चिकित्सा विषय की लिखित परीक्षा से जुड़ा है। विद्यार्थियों और सूत्रों के अनुसार परीक्षा प्रारंभ होने के कुछ ही मिनटों बाद प्रश्नपत्र के पृष्ठों की तस्वीरें विभिन्न संदेश समूहों में प्रसारित होने लगीं। कुछ विद्यार्थियों ने यह भी दावा किया कि परीक्षा के दौरान चुनिंदा समूहों में प्रश्नों के संभावित उत्तर भी साझा किए जा रहे थे। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उत्तर साझा किए जाने के दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
विश्वविद्यालय ने तत्काल बुलाई बैठक
घटना की जानकारी मिलने के बाद ओडिशा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मानस रंजन साहू ने उसी दिन सभी चिकित्सा महाविद्यालयों के प्राचार्यों के साथ आपातकालीन आभासी बैठक की। बैठक में आगामी प्रश्नपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा परीक्षा केंद्रों पर निगरानी और जांच व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए गए।
प्राचार्य बोले- तकनीकी रूप से इसे प्रश्नपत्र लीक नहीं कह सकते
एमकेसीजी चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता एवं प्राचार्य डॉ. हरेकृष्ण दलाई ने कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे पारंपरिक अर्थों में प्रश्नपत्र लीक नहीं कहा जा सकता। उनके अनुसार यदि प्रश्नपत्र परीक्षा प्रारंभ होने से पहले बाहर पहुंचता, तब उसे प्रश्नपत्र लीक माना जाता। इस मामले में परीक्षा शुरू होने के बाद परीक्षा कक्ष के भीतर से प्रश्नपत्र की तस्वीरें लेकर बाहर भेजे जाने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि परीक्षा कक्ष के भीतर से तस्वीरें किस प्रकार ली गईं और उन्हें बाहर कैसे भेजा गया।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल दूरभाष, बुद्धिमान घड़ी तथा अन्य किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है। प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों की जांच भी की जाती है। ऐसे में यह प्रश्न उठ रहा है कि प्रतिबंधों के बावजूद कोई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण परीक्षा कक्ष तक कैसे पहुंचा।
डॉ. दलाई ने भी इस पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि जांच दल यह पता लगाने में जुटा है कि किस प्रकार के उपकरण का उपयोग किया गया और सुरक्षा जांच के बावजूद वह परीक्षा कक्ष तक कैसे पहुंचा।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होंगी शेष परीक्षाएं
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रम की शेष लिखित परीक्षाएं पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 1 अगस्त और 5 अगस्त को आयोजित की जाएंगी। एमकेसीजी चिकित्सा महाविद्यालय केंद्र पर कुल 154 अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित हो रहे हैं।
प्रशासन का कहना है कि आगामी परीक्षाओं में अतिरिक्त निगरानी, कड़ी जांच और सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक उपाय लागू किए जाएंगे। जांच पूरी होने के बाद यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध विधिसम्मत और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों से अफवाहों पर ध्यान न देने तथा निष्पक्ष जांच पूरी होने तक आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करने की अपील की है।




