कपिल कुमार बर्मन

कॉकरोचों ने संसद की दहलीज तक पहुंच कर रचा इतिहास: लोकतंत्र के महाकुंभ का साक्षी बना भारत

-कपिल बर्मन-लोकतंत्र का महाकुंभ: जब युवाओं की हुंकार से गूंज उठी संसद की दहलीज 20 जुलाई 2026 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में केवल एक तारीख...

कबीर की लाठी, आज का पाखंड और मगहर का वो आखिरी सच!

कबीर की लाठी - संत कबीरदास के विचार, मगहर का ऐतिहासिक प्रसंग, धर्मान्धता, पाखंड और सामाजिक चेतना पर कपिल बर्मन (जागृत भारत) का विशेष विचार लेख।

फातिमा शेख: सावित्रीबाई फुले की सह-योद्धा और भारत की पहली मुस्लिम महिला शिक्षिका

-कपिल बर्मन- आज जब देश में सांप्रदायिक दीवारें ऊंची की जा रही हों और धर्म के नाम पर समाज को बांटने की कोशिशें सक्रिय...

अमेरिकी मनमानी और भारत की संप्रभुता: खेद जताने से नहीं, कदम उठाने से बचेगा राष्ट्रीय स्वाभिमान

-कपिल बर्मन-संप्रभुता की परीक्षा: क्या वैश्विक दबाव के आगे नतमस्तक हो रहा है आधुनिक भारत? भारत के संविधान की प्रस्तावना में 'संप्रभु' (Sovereign) शब्द...
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वैचारिक भटकाव और सांगठनिक बिखराव: दलित आंदोलनों की नियति?

-कपिल बर्मन- दलित आंदोलनों की सबसे बड़ी विडंबना यह रही है कि वे बहुत जल्द सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक सुधार के रास्ते को छोड़कर...
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