लेख

सत्ता को लोकतंत्र का जवाब: विपक्ष के प्रदर्शन से बढ़ी सरकार की चुनौती

-सचिन कुमार गौतमप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की राजनीति पर अक्सर यह आरोप लगाया जाता है कि सत्ता का प्रभाव उनके...

लोकतंत्र की परीक्षा और एसआईआर पर उठते सवाल

-सचिन कुमार गौतमदेश के लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने वाली संस्थाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर उठते सवाल चिंता का विषय हैं। मतदाता सूची...

मोएट्स से राजघाट: डर का साया और विपक्ष का संघर्ष

-सचिन कुमार गौतमचुनाव चोरी के आरोपों के खिलाफ इंडिया गठबंधन का आंदोलन गुरुवार को और तेज हो गया। मंगलवार और बुधवार के बाद गुरुवार...

​हौसलों का सफर : वेब वार्ता के 17 वर्ष और आपकी दुआएं

​संघर्षों की तपती धूप में जलकर, अपनों की निस्वार्थ दुआओं के साये में पनपती एक आत्मीय यात्रा​सत्रह वर्ष...! ​काल के असीम महासमुद्र में सत्रह साल...
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डॉ. दिनेश शर्मा की सक्रिय पहल से विकास की नई राह पर अंडमान-निकोबार

-अब्दुल साजिद- अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह भारत के नक्शे पर केवल कुछ खूबसूरत द्वीपों का समूह नहीं है, बल्कि यह देश की सामरिक सुरक्षा, समुद्री...

मोदी सरकार पर बढ़ता दबाव: राहुल गांधी की भविष्यवाणी और एसआईआर विवाद

-सचिन कुमार गौतम- राहुल गांधी ने चार महीने पहले, यानी मई में, एक ऐसा दावा किया था जिस पर उस वक्त भाजपा ने खूब हंसी...

“आई हैवन्ट डाइड येट!” लंदन की संसद के सामने गांधी की वह मूर्ति, जो इतिहास से सवाल करती है

गांधी की मूर्ति लंदन की Parliament Square में गांधी की मूर्ति Churchill की प्रतिमा के पास खड़ी है। यह सिर्फ एक स्मारक नहीं, बल्कि गांधी और ब्रिटिश साम्राज्य के बीच ऐतिहासिक संघर्ष और उनकी वैश्विक विरासत की कहानी भी है।

गांधी का पता…

गांधी का पता सिर्फ मकानों और शहरों की कहानी नहीं है। पोरबंदर से राजकोट, लंदन, दक्षिण अफ्रीका, साबरमती, सेवाग्राम और बिड़ला हाउस तक गांधी की ऐतिहासिक यात्रा जानिए।
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अरब सागर से पंजाब तक नशे का नेटवर्क देश की सुरक्षा और युवा पीढ़ी के लिए बड़ी चुनौती

-कांतिलाल मांडोत-"समुद्री सीमा की चौकसी के साथ समाज को भी बनना होगा नशामुक्ति की मजबूत दीवार"भारत की समुद्री सीमा से मादक पदार्थों की...

क्या ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई हो सकती है?

-संजय कुमार शर्मा- चुनाव आयोग को लेकर देश में उठ रहा विवाद अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त...

हक अपना, पैरवी दूसरे की: जब दलाल ही बन बैठा व्यवस्था की चाबी

जब नागरिक अपने ही हक के लिए बिचौलिये की तलाश करे, तो सवाल सिर्फ दलाली का नहीं, व्यवस्था की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही का भी है।

पं. रामावतार दीक्षित: शाहाबाद की सियासत का वह अध्याय, जिसे वक्त मिटा नहीं सका

लक्ष्मीकान्त पाठककुछ लोग राजनीति में आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन कुछ नाम समय के गुजरने के बाद भी अपने दौर की पहचान...
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महिला सुरक्षा पर नारे नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए

-पिंजड़ा नहीं, सुरक्षित आसमान चाहिए-सचिन कुमार गौतम- केंद्र की मोदी सरकार और दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार के लिए इससे बड़ी शर्म की बात...

भारतीय मूल की बोधना शिवानंदन ने इतिहास रचा, 11 साल की उम्र में बनीं सबसे युवा ‘महिला ग्रैंडमास्टर’

नई दिल्ली, 29 सितंबर (वेब वार्ता)। भारतीय मूल की 11 वर्षीय बोधना शिवानंदन ने चेस में इतिहास रच दिया है। बोधना ने उज्बेकिस्तान के...

लोकतंत्र की रक्षा और चुनाव आयोग का संकट

-सचिन कुमार गौतमलोकतंत्र को बनाए और बचाए रखने का एकमात्र उपाय है संविधान की बनाई व्यवस्था के मुताबिक निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव। नागरिकों को...
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