लेख
भारतीय व्यापारियों पर 100 प्रतिशत टैरिफ का बढ़ा खतरा
-सौरभ वार्ष्णेय-अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दुनिया में टैरिफ केवल आयात-निर्यात पर लगाया जाने वाला कर नहीं होता, बल्कि कई बार यह आर्थिक और कूटनीतिक दबाव...
यूपीआई पर शुल्क, नोटबंदी के बाद फिर एक धोखा
-सचिन कुमार गौतम-
यूपीआई: 2016 में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लिया गया नोटबंदी का फैसला अब भी भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में बहस का विषय...
बदलते समाज की देहरी पर ठिठकता वृद्ध जीवन
बरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मीकान्त पाठक का सामाजिक चिंतनकाल-चक्र का घूमता पहिया मनुष्य को निरंतर प्रगति, नवीनता और आधुनिकता के क्षितिज की ओर ले...
शाहाबाद की माटी, स्वाभिमान और सौरभ मिश्रा ‘नीरज’ की राजनीतिक यात्रा
शाहाबाद विधानसभा क्षेत्र, स्थानीय नेतृत्व और सौरभ मिश्रा 'नीरज' की राजनीतिक एवं वैचारिक यात्रा पर वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मीकान्त पाठक का विश्लेषण।
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28 जुलाई चातुर्मास: आत्म विकास का अपूर्व अवसर चातुर्मास
-कांतिलाल मांडोत-
भारतीय संस्कृति में समय को केवल दिनों और महीनों की गणना नहीं माना गया बल्कि जीवन को दिशा देने वाली शक्ति के...
इस्तीफा तो हो गया लेकिन क्या छात्रों को न्याय मिला? व्यवस्था बदले बिना अधूरा रहेगा पेपर लीक के खिलाफ संघर्ष
-कांतिलाल मांडोत-
कई दिनों के धरना-प्रदर्शन के बाद आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पहली नजर में...
नीट से शुरू, राजनीति पर खत्म!
-डॉ. प्रियंका सौरभ-लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि यहाँ जनता को सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है। यही अधिकार लोकतंत्र...
नैतिकता नहीं,भारी युवा आक्रोश के चलते हुआ शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा
-तनवीर जाफ़री-
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहा छात्रों व युवाओं का...
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विदेशी शक्तियों और भितरघातियों की जुगलबंदी विफल
लोकतंत्र में असहमति और शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिक अधिकारों का मूल आधार होता है परन्तु जब असहमति की आड़ में विदेशी धन, अत्याधुनिक तकनीक और...
नीट आंदोलन की आड़ में सत्ता को घेरने की राजनीति
-कांतिलाल मांडोत--छात्रों के भविष्य के सवाल से आगे बढ़कर क्या राजधानी में बड़े राजनीतिक टकराव और अस्थिरता की पटकथा लिखी जा रही हैनीट...
हर खोज बीमारी नहीं होती: गूगल और एआई पर स्वास्थ्य जानकारी की अति से बढ़ रहा साइबरकॉन्ड्रिया का खतरा
-कांतिलाल मांडोत-डिजिटल युग ने जानकारी तक पहुंच को बेहद आसान बना दिया है। आज किसी भी विषय पर कुछ ही सेकंड में उत्तर...
कॉकरोचों ने संसद की दहलीज तक पहुंच कर रचा इतिहास: लोकतंत्र के महाकुंभ का साक्षी बना भारत
-कपिल बर्मन-लोकतंत्र का महाकुंभ: जब युवाओं की हुंकार से गूंज उठी संसद की दहलीज
20 जुलाई 2026 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में केवल एक तारीख...
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ट्रंप की नीतियों ने विश्व में गिराई अमेरिका की साख
-तनवीर जाफ़री-दरअसल 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद ही अमेरिका को विश्व की सबसे बड़ी महाशक्ति के रूप में वैश्विक मान्यता मिल चुकी...
सोनम वांगचुक और सुर्खियों से आगे का सच
(मीडिया नैरेटिव बनाम जनसमर्थन: क्या किसी आंदोलन की वास्तविक ताकत कैमरों से तय होती है?) -डॉ. प्रियंका सौरभ-लोकतंत्र में किसी भी आंदोलन की सफलता का...
बलशालियों के समक्ष मौथला होता कानूनी हथियार
भारतीय लोकतंत्र आज एक अत्यंत संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। स्वतंत्रता के अमृतकाल में जहां एक पारदर्शी, जवाबदेह और लोक-कल्याणकारी व्यवस्था...
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