नई दिल्ली, 19 मई (वेब वार्ता)। देशभर में आवारा कुत्तों और दूसरे पशुओं से जुड़े मामलों पर आज सुप्रीम कोर्ट महत्वपूर्ण फैसला सुनाएगा। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ सुबह साढ़े दस बजे अपना निर्णय सुनाएगी। इस मामले में विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने 29 जनवरी को आदेश सुरक्षित रख लिया था, जिसके बाद अब सभी पक्षों की निगाहें शीर्ष अदालत के फैसले पर टिकी हुई हैं।
मामला सार्वजनिक स्थलों पर बढ़ती कुत्तों के काटने की घटनाओं, लोगों की सुरक्षा और पशु संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने से जुड़ा है। बीते वर्ष 7 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, सरकारी कार्यालयों और खेल परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों और तीव्रगामी मार्गों से आवारा गाय और बैलों को हटाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया था।
इससे पहले 11 अगस्त को न्यायमूर्ति जे. बी. पारडीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने कुत्तों के काटने की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में सभी आवारा कुत्तों को शरण गृहों में रखने का आदेश दिया था। अदालत ने उस समय सार्वजनिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कठोर रुख अपनाया था।
हालांकि इस आदेश का पशु संरक्षण से जुड़े संगठनों और पशु प्रेमियों ने व्यापक विरोध किया। उनका कहना था कि सभी आवारा कुत्तों को बंद करना व्यावहारिक नहीं है और इससे पशु अधिकारों का हनन होगा। विरोध और पुनर्विचार याचिकाओं के बाद मामला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ को सौंपा गया।
तीन सदस्यीय पीठ ने 22 अगस्त को पहले दिए गए आदेश में संशोधन करते हुए केवल आक्रामक और खतरनाक कुत्तों को शरण गृहों में रखने का निर्देश दिया। वहीं अन्य कुत्तों के लिए नसबंदी और टीकाकरण के बाद उन्हें उनके मूल क्षेत्र में वापस छोड़े जाने की व्यवस्था को उचित माना गया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुनवाई को केवल दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि पूरे देश के संदर्भ में इस विषय पर विचार किया जाएगा।
इसके बाद 7 नवंबर को शीर्ष अदालत ने सार्वजनिक भवनों और संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का व्यापक आदेश दिया। इस आदेश को लेकर भी विभिन्न पक्षों की ओर से आपत्तियां दर्ज कराई गईं। जनवरी में अदालत ने कहा कि अंतिम निर्णय से पहले सभी पक्षों को विस्तार से सुना जाएगा। कई दिनों तक चली सुनवाई के बाद 29 जनवरी को आदेश सुरक्षित रख लिया गया था।
आज आने वाला फैसला केवल आवारा कुत्तों के प्रबंधन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा, पशु कल्याण और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन तय करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय साबित हो सकता है। अदालत का फैसला भविष्य में देशभर में पशु प्रबंधन संबंधी नीतियों और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली को भी प्रभावित कर सकता है।




