रुद्रपुर, 12 सितंबर (वेब वार्ता)। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने रुद्रपुर-रामपुर सीमा पर आयोजित पंजाबी गौरव सम्मेलन के जरिए उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में संगठन तथा पंजाबी-सिख समाज के बीच राजनीतिक जुड़ाव मजबूत करने का संदेश दिया। निजी होटल में आयोजित सम्मेलन में उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर के रुद्रपुर, किच्छा, गदरपुर और बाजपुर के साथ उत्तर प्रदेश के रामपुर, रुद्र बिलास, बिलासपुर और मिलक से बड़ी संख्या में सिख किसान और पंजाबी समाज के लोग पहुंचे।
रामपुर और रुद्रपुर को तराई क्षेत्र में सांस्कृतिक तथा कृषि गतिविधियों के लिहाज से एक-दूसरे से जुड़ा क्षेत्र माना जाता है। इसी वजह से सम्मेलन के लिए दोनों राज्यों की सीमा से सटे क्षेत्र को चुना गया। राजनीतिक दृष्टि से भी यह आयोजन महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि दोनों राज्यों में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और तराई क्षेत्र में पंजाबी-सिख मतदाताओं की भूमिका कई सीटों पर निर्णायक मानी जाती है।
सिख समाज के योगदान और आस्था से जुड़े मुद्दों पर जोर
नितिन नवीन ने अपने करीब 14 मिनट के संबोधन में सिख समाज के योगदान और उसकी गौरवशाली परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने वर्ष 1984 के दंगा पीड़ितों को न्याय, करतारपुर गलियारे और हेमकुंड रोपवे जैसे विषयों का जिक्र कर सिख समाज से भावनात्मक जुड़ाव बनाने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि उन्होंने पटना साहिब में सिख समुदाय को जिस तरह एकजुट होकर आगे बढ़ते देखा है, उसी तरह उत्तराखंड में भी सिख समाज एकता के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने में उत्तराखंड की भूमिका महत्वपूर्ण होगी और इसमें पंजाबी समाज सहित सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है।
धामी के नेतृत्व पर राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जताया भरोसा
सम्मेलन के दौरान नितिन नवीन का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व को लेकर दिया गया बयान भी चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में भाजपा का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में आगे बढ़ने की क्षमता रखता है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि धामी ने प्रदेश के लोगों को जोड़ने और समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर चलने का काम किया है। उनके नेतृत्व में उत्तराखंड विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। सम्मेलन में मुख्यमंत्री की खुलकर प्रशंसा को पार्टी नेतृत्व के समर्थन के संकेत के तौर पर देखा गया।
पंजाबी-सिख मतदाताओं पर भाजपा की नजर
ऊधमसिंह नगर की विधानसभा सीटों में पंजाबी-सिख मतदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। वहीं रामपुर लोकसभा क्षेत्र तथा बिलासपुर और मिलक विधानसभा क्षेत्रों में भी सिख मतदाताओं को प्रभावशाली माना जाता है। ऐसे में सम्मेलन के जरिए भाजपा ने पंजाबी और सिख समाज के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच मजबूत करने का संदेश दिया।
मंच पर सांसद अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, प्रदीप बत्रा, राम सिंह कैड़ा, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, विधायक अरविंद पांडेय समेत तराई क्षेत्र के कई विधायक और वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नेताओं की एक साथ मौजूदगी के जरिए पार्टी ने संगठनात्मक एकजुटता का संदेश भी दिया।
विद्यालयों में गूंजेगी गुरुबाणी : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंजाबी गौरव सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि पंजाबी समाज की गौरवशाली परंपरा, संस्कृति, संस्कार, साहस, सेवा और राष्ट्रभक्ति का जीवंत प्रतीक है।
उन्होंने सिख गुरुओं की परंपरा को भारत की श्रेष्ठ सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि गुरु साहिबान का जीवन अन्याय के सामने न झुकने, जरूरतमंदों की सेवा करने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है।
धामी ने कहा कि राज्य में धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानूनों को सख्त किया गया है। उन्होंने मदरसा बोर्ड समाप्त कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यालयों में अब गुरुबाणी गूंजेगी और गुरुओं के पावन संदेश सुनाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सिख समाज की आस्था, बलिदान और गौरवशाली परंपरा को राष्ट्र के सम्मान के रूप में स्थापित किया गया है। सरकार का लक्ष्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जहां विकास के साथ विरासत का सम्मान, आधुनिकता के साथ संस्कार और प्रगति के साथ सामाजिक समरसता कायम रहे।
मुख्यमंत्री ने तराई क्षेत्र के विकास में पंडित गोविंद बल्लभ पंत के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
सात स्थानों पर हुआ राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत
नितिन नवीन के रुद्रपुर पहुंचने पर शहर में विभिन्न स्थानों पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। प्रमुख मार्गों और चौराहों पर स्वागत द्वार सजाए गए थे। सिख समुदाय, देसी समाज, मुस्लिम महिलाओं समेत सात अलग-अलग समुदायों के लोगों ने पुष्पवर्षा कर भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष का अभिनंदन किया।
नितिन नवीन का हेलिकॉप्टर पुलिस लाइन में उतरा। इसके बाद वह कार से सम्मेलन स्थल की ओर रवाना हुए। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया।
मुख्य बाजार के मोड़ पर काशीपुर जिला भाजपा सह प्रभारी भारत भूषण चुघ ने कार्यकर्ताओं के साथ उनका स्वागत किया। डिग्री कॉलेज के पास अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम ने मुस्लिम महिलाओं के साथ पुष्पवर्षा कर अभिनंदन किया। अन्य स्थानों पर भी विभिन्न समुदायों के लोगों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत किया।
सम्मेलन में किसानों ने जताया भाजपा पर भरोसा
पंजाबी गौरव सम्मेलन में पहुंचे तराई क्षेत्र के किसानों ने भाजपा सरकार की नीतियों और सिख समाज के प्रति उसके रुख की सराहना की। किसानों ने कहा कि भाजपा शासन में सिख समुदाय को सम्मान मिला है और किसानों के हित में भी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
नानकमत्ता के फूल सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार ने सिख समाज की भावनाओं और विरासत का सम्मान किया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष का तराई में आना समाज के लिए गौरव और उत्साह का विषय है।
गदरपुर के प्रीतम सिंह ने करतारपुर गलियारे और वीर बाल दिवस जैसे फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे सिख समाज की आस्था और इतिहास को सम्मान मिला है।
केलाखेड़ा के प्रेम सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पंजाबी समाज के संघर्ष और योगदान को जिस सम्मान के साथ याद किया, उससे समाज में गौरव की भावना मजबूत हुई है। काशीपुर के अनूप सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार ने सिख समाज की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं।
काशीपुर के ही अर्जुन सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार ने विकास के साथ धार्मिक विरासत और सिख समाज के सम्मान को प्राथमिकता दी है। उनके मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष का संदेश समाज को नई ऊर्जा देने वाला रहा।
कुल मिलाकर पंजाबी गौरव सम्मेलन के जरिए भाजपा ने तराई क्षेत्र में पंजाबी-सिख समाज से संवाद बढ़ाने, संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों के लिए राजनीतिक आधार तैयार करने का प्रयास किया। सम्मेलन में राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रति विश्वास जताए जाने और विभिन्न समुदायों की भागीदारी ने इसे संगठनात्मक और राजनीतिक, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बना दिया।




