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ममता बनर्जी के काफिले पर विरोध के बाद शुभेंदु अधिकारी बोले- वहां भाजपा का कोई नहीं था, जनता का गुस्सा था

कोलकाता, 10 अगस्त (वेब वार्ता)। पश्चिम बंगाल के हलीशहर में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले के विरोध के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भारतीय जनता पार्टी की किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को जिस विरोध का सामना करना पड़ा, वह जनता के गुस्से का प्रदर्शन था और मौके पर भाजपा का कोई कार्यकर्ता या पार्टी का झंडा मौजूद नहीं था।

ममता बनर्जी रविवार को उत्तर 24 परगना जिले के हलीशहर में तृणमूल कांग्रेस के एक मृत कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जा रही थीं। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने उनके वाहन को घेर लिया और ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए। उनके वाहन पर कीचड़, जूते और पत्थर फेंके जाने के आरोप भी सामने आए। घटना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

शुभेंदु अधिकारी ने भाजपा की भूमिका से किया इनकार

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घटना में भाजपा कार्यकर्ताओं की संलिप्तता से साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में भाजपा का कोई कार्यकर्ता शामिल नहीं था और न ही वहां पार्टी का झंडा दिखाई दिया।

शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी पर राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि यदि जनता में उनके प्रति असंतोष है तो उन्हें उसका सामना करना होगा। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान लगाए गए ‘चोर’ के नारों का उल्लेख करते हुए ममता बनर्जी के पूर्व शासन और उनकी सरकार पर भी सवाल उठाए।

मृत तृणमूल कार्यकर्ता के परिवार से मिलने पहुंची थीं ममता

ममता बनर्जी हलीशहर में तृणमूल कांग्रेस के उस कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जा रही थीं, जिसकी कथित तौर पर पुलिस हिरासत में मौत हुई थी। इसी दौरान उनका काफिला प्रदर्शनकारियों के बीच घिर गया।

प्रत्यक्षदर्शियों और सामने आई खबरों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने ममता बनर्जी के वाहन के खिलाफ नारेबाजी की और कथित तौर पर वाहन पर पत्थर, जूते तथा कीचड़ फेंका। भाजपा की ओर से भी इस घटना की निंदा की गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई पार्टी की राजनीतिक संस्कृति के अनुरूप नहीं है।

‘अभया’ मामले को लेकर भी ममता पर निशाना

शुभेंदु अधिकारी ने आरजी कर मामले की पीड़िता को संदर्भित करते हुए ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि ममता बनर्जी ने पीड़िता के परिवार से मुलाकात क्यों नहीं की।

उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ से मिलकर माफी मांगनी चाहिए थी। रत्ना देबनाथ हाल में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा विधायक निर्वाचित हुई हैं।

शुभेंदु अधिकारी ने इस मुद्दे को हलीशहर की घटना से जोड़ते हुए ममता बनर्जी के पूर्व शासनकाल में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर भी सवाल उठाए।

कांग्रेस ने घटना की निंदा की

ममता बनर्जी के काफिले पर हुए कथित हमले की कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने निंदा की। उन्होंने भाजपा पर पश्चिम बंगाल में भय और अराजकता का वातावरण बनाने का आरोप लगाया।

अशोक गहलोत ने कहा कि किसी भी राजनीतिक विरोध को हिंसक रूप देना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। उन्होंने ममता बनर्जी के काफिले पर हुई घटना को राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति से जोड़ते हुए इसकी आलोचना की।

ममता बनर्जी ने भाजपा पर लगाया आरोप

घटना के बाद ममता बनर्जी ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ प्रदर्शन राजनीतिक रूप से प्रायोजित था और भाजपा समर्थकों की ओर से मृत तृणमूल कार्यकर्ता के परिवार को कथित तौर पर धमकाया जा रहा था।

ममता बनर्जी ने राज्य सरकार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पुलिस बल का इस्तेमाल राजनीतिक निर्देशों पर किया जा रहा है। हालांकि, भाजपा और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घटना में पार्टी की भूमिका से इनकार किया है।

घटना के बाद बढ़ा राजनीतिक टकराव

हलीशहर की घटना ने पश्चिम बंगाल में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है। एक ओर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी इसे जनता के असंतोष का परिणाम बता रहे हैं, वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे राजनीतिक हिंसा और सुनियोजित हमले के रूप में देख रही है।

घटना को लेकर भाजपा ने भी हिंसा की निंदा की है। ऐसे में अब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर रहेगी कि ममता बनर्जी के काफिले का विरोध किन लोगों ने किया और इस दौरान हिंसा की स्थिति कैसे बनी।

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