नई दिल्ली, 10 अगस्त (वेब वार्ता)। भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह से जुड़े महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत की विस्तृत टिप्पणी के बाद राजनीतिक विवाद फिर तेज हो गया है। अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को मामले में बरी करते हुए आरोपों को लेकर गंभीर टिप्पणियां कीं। अदालत ने मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित और आरोपों को प्रथम दृष्टया झूठा एवं मनगढ़ंत बताए जाने संबंधी निष्कर्ष दर्ज किए।
अदालत के इस फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष और प्रदर्शनकारी पहलवानों पर राजनीतिक हमला तेज कर दिया है। भाजपा की ओर से कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति पर लगाए गए आरोप अदालत में साबित नहीं होते हैं तो झूठे आरोप लगाने वालों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर बरी
राउज एवेन्यू अदालत के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को महिला पहलवानों से जुड़े यौन उत्पीड़न के मामले में बरी किया। यह मामला छह महिला पहलवानों की ओर से लगाए गए आरोपों से जुड़ा था। अदालत के अनुसार अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा।
अदालत की विस्तृत टिप्पणी में दो महिला पहलवानों के सुनवाई के दौरान अपने पूर्व बयानों से पीछे हटने का भी उल्लेख किया गया। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का मूल्यांकन करने के बाद अभियोजन के मामले को पर्याप्त रूप से प्रमाणित नहीं माना।
अदालत ने राजनीतिक साजिश की ओर किया इशारा
अदालत के आदेश में कहा गया कि मामले की पृष्ठभूमि और सामने आए साक्ष्यों से आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होते हैं। न्यायालय ने आरोपों को लेकर ‘झूठे’ और ‘मनगढ़ंत’ होने की टिप्पणी भी की। इसी आधार पर मामले की प्रकृति और उसके पीछे संभावित राजनीतिक उद्देश्य को लेकर अदालत ने सवाल उठाए।
अदालत की टिप्पणियां सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने इसे अपने पक्ष में महत्वपूर्ण न्यायिक निष्कर्ष के रूप में पेश किया है। हालांकि, मामले से जुड़े आरोपों और न्यायालय के निष्कर्षों को समझने के लिए पूरे आदेश तथा उपलब्ध साक्ष्यों के संदर्भ को देखना महत्वपूर्ण है।
अमित मालवीय ने उठाई जवाबदेही की मांग
भाजपा के सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने अदालत की टिप्पणी के बाद सामाजिक माध्यम पर प्रतिक्रिया देते हुए झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाकर उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के बाद न्यायालय के निर्णय आने पर मामले से अलग हो जाना पर्याप्त नहीं हो सकता। मालवीय ने आरोप लगाया कि मामले को लेकर लंबे समय तक सार्वजनिक और राजनीतिक स्तर पर अभियान चलाया गया तथा अब जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
2023 में जंतर-मंतर पर हुआ था बड़ा प्रदर्शन
बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आरोपों को लेकर वर्ष 2023 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर महिला पहलवानों ने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था। ओलंपिक पदक विजेता विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया सहित कई पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर महिला खिलाड़ियों के यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। विवाद बढ़ने के बाद मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा और दिल्ली पुलिस ने अप्रैल 2023 में दो प्राथमिकी दर्ज की थीं। बाद में पुलिस ने मामले में आरोपपत्र भी दाखिल किया था।
राजनीतिक रूप से भी गरमाया था मामला
बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आंदोलन का असर राजनीति पर भी पड़ा था। विपक्षी दलों ने महिला पहलवानों के समर्थन में केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा था। आंदोलन के दौरान बृजभूषण शरण सिंह को भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पद से हटाने और उनकी गिरफ्तारी की मांग प्रमुखता से उठाई गई थी।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने कैसरगंज लोकसभा सीट से बृजभूषण शरण सिंह को उम्मीदवार नहीं बनाया। उनकी जगह उनके बेटे करन भूषण सिंह को टिकट दिया गया, जिन्होंने चुनाव में जीत दर्ज की।
फैसले के बाद फिर आमने-सामने भाजपा और विपक्ष
अदालत के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। भाजपा अदालत की टिप्पणियों के आधार पर आरोप लगाने वालों की जवाबदेही की मांग कर रही है, जबकि मामले से जुड़े पहलवानों की ओर से फैसले को चुनौती देने की संभावना जताई गई है। कानूनी दृष्टि से बरी किए जाने का अर्थ यह है कि मौजूदा आपराधिक मामले में अभियोजन पक्ष आरोपों को आवश्यक कानूनी मानक के अनुसार सिद्ध नहीं कर सका। ऐसे में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और संभावित चुनौती पर सभी पक्षों की नजर बनी हुई है।




