नई दिल्ली, 10 अगस्त (वेब वार्ता)। पेपर लीक और परीक्षा में कथित धांधली के विरोध में 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर फिर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक छवि को भारी नुकसान पहुंच चुका है और इसे अब पहले जैसी स्थिति में लाना संभव नहीं होगा।
राहुल गांधी ने अंग्रेजी समाचार पत्र ‘द हिंदू’ में प्रकाशित अपने लेख में आरोप लगाया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस और सुरक्षा बलों ने लाठियों, छर्रे वाली बंदूकों और आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया। उन्होंने 19 वर्षीय साहिल लोचब का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उसके शरीर के ऊपरी हिस्से में छर्रे लगे और आंख में छर्रा लगने के कारण उसकी दृष्टि प्रभावित होने की आशंका है।
महिलाओं और नाबालिगों पर भी कार्रवाई का आरोप
राहुल गांधी ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने युवा महिलाओं पर भी लाठियां बरसाईं और नाबालिग प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इस कार्रवाई का आदेश किस स्तर से दिया गया था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिस स्थान पर कार्रवाई हुई, वह संसद भवन से कुछ ही दूरी पर है। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की केंद्रीकृत कार्यप्रणाली का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में कार्रवाई की जिम्मेदारी गृह मंत्री के स्तर पर तय होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने अमित शाह के इस्तीफे की मांग की
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका रहती है। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को गृह मंत्री की मंजूरी थी तो इसके लिए उन्हें जिम्मेदार माना जाना चाहिए और यदि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी तो यह उनके मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि दोनों ही परिस्थितियों में अमित शाह को केंद्रीय गृह मंत्री के पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने सरकार पर घटना की स्वतंत्र जांच नहीं कराने और संसद में इस विषय पर चर्चा से बचने का भी आरोप लगाया।
सरकार पर युवाओं को डराने का आरोप
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर प्राथमिकी दर्ज करने, हिरासत में लेने और सामाजिक माध्यमों के माध्यम से दबाव बनाने जैसी कार्रवाई के जरिए भय का वातावरण तैयार करने की कोशिश की गई।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से युवाओं के प्रदर्शन को लेकर जारी किए गए कथित ‘माफ करने’ संबंधी संदेश पर भी सवाल उठाया। राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को केवल ऐसे संदेशों से समाप्त नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि देश के युवा अब अपने अधिकारों और भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर जागरूक हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों और युवाओं के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर जवाबदेही तय करनी होगी।
संसद में गतिरोध बरकरार
छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा संसद के मानसून सत्र में भी राजनीतिक टकराव का कारण बना हुआ है। विपक्षी दलों की मांग है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दोनों सदनों में इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार का पक्ष रखें। विपक्ष की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की जा रही है।
20 जुलाई को परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़ी संख्या में युवाओं ने दिल्ली में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों की ओर से संसद की ओर मार्च का प्रयास किया गया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कार्रवाई की। इस दौरान लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की खबरें सामने आई थीं। कुछ स्थानों पर छर्रे वाली बंदूकों के इस्तेमाल के आरोप भी लगाए गए।
इस घटना के बाद से ही सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं। विपक्ष जहां पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं सरकार की ओर से प्रदर्शन और संसद की कार्यवाही से जुड़े मुद्दों पर संसदीय नियमों के तहत चर्चा की बात कही जा रही है।




