कारोबारइथेनॉल बन सकता है रसोई का नया ईंधन,...

इथेनॉल बन सकता है रसोई का नया ईंधन, एलपीजी पर निर्भरता होगी कम

नई दिल्ली, 22 जून (वेब वार्ता)। वैश्विक अनिश्चितताओं और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों के बीच अब इथेनॉल को एलपीजी के विकल्प के रूप में देखा जाने लगा है। पेट्रोल में मिश्रण के बाद अब भविष्य में इथेनॉल का उपयोग रसोई ईंधन के रूप में भी किए जाने की संभावनाएं तेज हो गई हैं। सरकारी तेल कंपनियां भी हरित ऊर्जा नीति के तहत इथेनॉल आधारित रसोई ईंधन और उससे संचालित चूल्हे विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं।

इथेनॉल उत्पादक कंपनियों का मानना है कि एलपीजी की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बीच इथेनॉल एक किफायती और टिकाऊ विकल्प बन सकता है। इसी क्रम में सरकारी तेल कंपनियां इथेनॉल आधारित रसोई ईंधन को बाजार में उतारने की तैयारियों में जुटी हुई हैं।

इथेनॉल पर क्यों बढ़ रहा है जोर?

देश में इथेनॉल उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है। इसका निर्माण मुख्य रूप से गन्ने के रस, मक्का तथा अनुपयोगी या खराब अनाज से किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आयातित एलपीजी की तुलना में इथेनॉल अपेक्षाकृत सस्ता साबित हो सकता है।

भारत अपनी घरेलू आवश्यकता का बड़ा हिस्सा एलपीजी आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ता है। यदि इथेनॉल को बड़े स्तर पर रसोई ईंधन के रूप में अपनाया जाता है, तो इससे आयातित ईंधन पर निर्भरता कम हो सकती है।

पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प

विशेषज्ञों के अनुसार, इथेनॉल आधारित चूल्हे पारंपरिक लकड़ी या कोयले से चलने वाले चूल्हों की तुलना में अधिक स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल होंगे। इनके उपयोग से धुआं और प्रदूषण कम होगा, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी घटेंगे।

इसके अलावा, इथेनॉल आधारित ईंधन को अपेक्षाकृत सुरक्षित भी माना जा रहा है। इससे गैस रिसाव और सिलेंडर विस्फोट जैसी घटनाओं की आशंका कम हो सकती है।

कई देशों में पहले से हो रहा उपयोग

दुनिया के कई देशों में इथेनॉल का उपयोग पहले से ही रसोई ईंधन के रूप में किया जा रहा है। अफ्रीकी देशों जैसे केन्या, इथियोपिया, घाना, तंजानिया, मेडागास्कर और मोजांबिक में अस्पतालों, छात्रावासों और सामुदायिक रसोईघरों में इसका व्यापक उपयोग होता है।

इसके अलावा एशिया के कुछ देशों तथा लैटिन अमेरिकी देशों में भी इथेनॉल आधारित रसोई ईंधन को अपनाया जा चुका है। इन देशों के अनुभवों के आधार पर भारत में भी इस दिशा में संभावनाएं तलाश की जा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इथेनॉल आधारित रसोई ईंधन को बड़े पैमाने पर अपनाया जाता है, तो यह न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -

More articles

- Advertisement -
- Advertisement -