ऊधम सिंह नगर, 17 जून (वेब वार्ता)। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव भले ही अभी दूर हों, लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हालिया खटीमा दौरे ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। तीन दिवसीय प्रवास के दौरान भाजपा नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंचों से मुख्यमंत्री से 2027 का विधानसभा चुनाव खटीमा से लड़ने की अपील किए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में अटकलों का दौर तेज हो गया है।
खटीमा मुख्यमंत्री धामी की राजनीतिक कर्मभूमि रही है। वर्ष 2012 और 2017 में वह लगातार दो बार इसी विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए थे। वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी जिम्मेदारियां बढ़ीं और क्षेत्र में उनकी सक्रियता पहले की तुलना में कम हो गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक चुनौतियां और गुटबाजी भी 2022 के विधानसभा चुनाव में उनकी हार के कारणों में शामिल रहीं।
हालांकि खटीमा से चुनाव हारने के बावजूद भाजपा नेतृत्व ने उन पर भरोसा कायम रखा और उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद उन्होंने चंपावत विधानसभा उपचुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर विधानसभा में वापसी की थी।
अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का खटीमा में लगातार सक्रिय होना राजनीतिक संकेतों के रूप में देखा जा रहा है। अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान उन्होंने विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों, संगठनात्मक बैठकों और जनसंपर्क अभियानों में हिस्सा लिया। इसके अलावा खटीमा में आयोजित रोड शो भी चर्चा का केंद्र बना रहा।
दौरे के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्या सहित कई भाजपा नेताओं ने सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री से आगामी विधानसभा चुनाव खटीमा से लड़ने का आग्रह किया। इन अपीलों पर मुख्यमंत्री ने कोई प्रत्यक्ष राजनीतिक घोषणा तो नहीं की, लेकिन उन्होंने भावनात्मक अंदाज में कहा कि खटीमा उनके दिल में बसता है और यह क्षेत्र उनके लिए विशेष महत्व रखता है।
मुख्यमंत्री के इस बयान को राजनीतिक पर्यवेक्षक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देख रहे हैं। हालांकि भाजपा की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है, लेकिन खटीमा में बढ़ती सक्रियता और स्थानीय नेताओं की खुली अपीलों ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या 2027 में मुख्यमंत्री धामी एक बार फिर अपनी पुरानी सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगे।
फिलहाल राजनीतिक समीकरणों और संगठनात्मक रणनीतियों को देखते हुए यह स्पष्ट नहीं है कि मुख्यमंत्री धामी खटीमा से चुनाव लड़ेंगे या चंपावत से ही अपनी दावेदारी बनाए रखेंगे। लेकिन इतना तय है कि उनके हालिया दौरे ने उत्तराखंड की राजनीति में आगामी चुनावों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में मुख्यमंत्री की क्षेत्रीय सक्रियता और पार्टी की रणनीति इस सवाल का उत्तर तय करेगी कि 2027 के चुनाव में उनकी राजनीतिक पारी किस विधानसभा क्षेत्र से आगे बढ़ेगी।




