देहरादून, 15 सितंबर (वेब वार्ता)। एमबीबीएस दाखिले के लिए चल रही नीट-यूजी काउंसलिंग के बीच जाति प्रमाणपत्रों की वैधता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। काउंसलिंग के प्रथम चरण में सीट हासिल करने वाले आठ अभ्यर्थियों के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्रों को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी आठ अभ्यर्थियों को मूल दस्तावेजों के साथ तलब किया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन मंगलवार को अभ्यर्थियों के मूल जाति प्रमाणपत्रों के साथ अन्य संबंधित दस्तावेजों की भी जांच करेगा। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित प्रमाणपत्र निर्धारित नियमों और पात्रता मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।
आरक्षण से जुड़े प्रमाणपत्रों की होगी जांच
प्राप्त शिकायतों में आठ अभ्यर्थियों के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आरक्षण से जुड़े प्रमाणपत्रों की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय ने केवल प्रमाणपत्रों की औपचारिक जांच तक सीमित न रहते हुए उनका विस्तृत सत्यापन कराने का निर्णय लिया है।
जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि संबंधित प्रमाणपत्र किस सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए हैं और उनकी वैधता क्या है। इसके अलावा अभ्यर्थी आरक्षण का लाभ लेने के लिए निर्धारित पात्रता मानकों को पूरा करते हैं या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जाएगी।
मूल दस्तावेजों के साथ बुलाए गए अभ्यर्थी
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी आठ अभ्यर्थियों को निर्धारित तिथि पर अपने मूल दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। इसमें मूल जाति प्रमाणपत्र के अलावा दाखिले और आरक्षण से संबंधित अन्य आवश्यक दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. विजय जुयाल ने आठ अभ्यर्थियों को मूल दस्तावेजों के साथ बुलाए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि सभी प्रमाणपत्रों की गहनता से जांच की जाएगी। सत्यापन पूरा होने के बाद ही शिकायतों में कितनी वास्तविकता है, यह सामने आएगा।
प्रमाणपत्र नियमों के विपरीत मिले तो होगी कार्रवाई
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, जांच के दौरान प्रमाणपत्र जारी करने वाले सक्षम प्राधिकारी, प्रमाणपत्र की वैधता, अभ्यर्थी की आरक्षण पात्रता और संबंधित नियमों का पालन किए जाने सहित कई बिंदुओं की जांच की जाएगी।
यदि सत्यापन में किसी प्रमाणपत्र में अनियमितता पाई जाती है या यह सामने आता है कि अभ्यर्थी ने निर्धारित पात्रता पूरी किए बिना आरक्षण का लाभ लिया है, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिकायतों को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला है। सभी आठ अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। ऐसे में सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी अभ्यर्थी के प्रमाणपत्र को गलत या फर्जी मानना उचित नहीं होगा।
नीट-यूजी दाखिले की प्रक्रिया के बीच बढ़ी सतर्कता
नीट-यूजी काउंसलिंग के दौरान आरक्षण से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन दाखिले की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जाति प्रमाणपत्रों में किसी भी तरह की अनियमितता का सीधा असर आरक्षित सीटों पर दाखिले और पात्र अभ्यर्थियों के अधिकारों पर पड़ सकता है।
इसी वजह से विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मूल दस्तावेजों की जांच का निर्णय लिया है। अब मंगलवार को होने वाले सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आठों अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।




