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समरसता संकल्प कलश यात्रा काशी रवाना, उत्तराखण्ड के 411 स्थानों पर होगा दीपोत्सव

देहरादून, 28 जुलाई (वेब वार्ता)। संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रारम्भ किए गए समरसता संकल्प अभियान के अंतर्गत पावन कलश यात्रा काशी के लिए रवाना हो गई। समाज कल्याण योजनाओं एवं अनुश्रवण समिति के उपाध्यक्ष (राज्य मंत्री स्तर) देशराज कर्णवाल के नेतृत्व में 28 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल देहरादून से संत रविदास की जन्मस्थली के लिए प्रस्थान किया। अभियान का उद्देश्य संत रविदास के समरसता, समानता और सामाजिक सद्भाव के संदेश को पूरे उत्तराखण्ड तक पहुंचाना है।

देशराज कर्णवाल ने कहा कि संत रविदास के विचार आज भी समाज को एकता, समानता और भाईचारे का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने बताया कि 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रदेश के 411 से अधिक स्थानों पर दीपोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जहां श्रद्धालु दीप प्रज्ज्वलित कर संत रविदास को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे तथा सामाजिक समरसता का संकल्प लेंगे।

समरसता संकल्प अभियान के तहत काशी के लिए रवाना हुई पावन कलश यात्रा में देशराज कर्णवाल एवं प्रतिनिधिमंडलउन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है। अभियान के माध्यम से समाज में समान अवसर, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता की भावना को और अधिक सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

अभियान के अगले चरण में 30 जुलाई को हरिद्वार जनपद के भगवानपुर (रुड़की) में भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के शामिल होने का कार्यक्रम है। इस अवसर पर ग्राम चुड़ियाला स्थित संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज के मंदिर में पावन कलशों की स्थापना एवं पूजन किया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रदेश के 19 संगठनात्मक जिलों के प्रतिनिधियों को पावन कलश सौंपेंगे। इसके बाद यह कलश संबंधित जिलों में पहुंचेंगे, जहां विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से संत रविदास के संदेश का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

देशराज कर्णवाल ने प्रदेशवासियों, सामाजिक संगठनों, युवाओं और श्रद्धालुओं से अभियान में सक्रिय सहभागिता का आह्वान करते हुए कहा कि संत रविदास का संदेश आज भी सामाजिक समरसता और मानव समानता के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और जनभागीदारी का व्यापक प्रयास है, जिसके माध्यम से समाज में भेदभाव समाप्त कर सद्भाव और एकजुटता को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समरसता संकल्प अभियान संत रविदास के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा। उत्तराखण्ड के विभिन्न जनपदों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के माध्यम से संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे समाज में समानता, सौहार्द और सहभागिता की भावना को और अधिक बल मिलेगा।

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