जम्मू, 15 सितंबर (वेब वार्ता)। जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से घुसपैठ पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के बीच हथियारों की तस्करी के लिए नए तौर-तरीकों के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। जम्मू पुलिस ने अरनिया क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए कथित तौर पर ‘खौफ गैंग’ से जुड़े छह लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में तीन नाबालिग भी शामिल हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से तीन पिस्तौल और छह जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नाबालिगों का इस्तेमाल हथियारों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि नाबालिगों को इस नेटवर्क में इसलिए इस्तेमाल किया जा रहा था, ताकि उनकी उम्र और पहचान के कारण सुरक्षा एजेंसियों को उन पर आसानी से संदेह न हो।
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के स्थानीय और सीमा पार संपर्कों की जांच कर रही है।
अरनिया में पुलिस ने दबोचा हथियार तस्करी का नेटवर्क
जम्मू पुलिस के अनुसार, कार्रवाई की शुरुआत अरनिया क्षेत्र में मिले एक खुफिया इनपुट के बाद हुई। पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग हथियारों की आपूर्ति से जुड़े एक नेटवर्क में सक्रिय हैं। इसके बाद संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी गई और जांच आगे बढ़ाई गई।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया। तलाशी में तीन पिस्तौल और छह जिंदा कारतूस बरामद हुए। प्रारंभिक जांच में यह आशंका सामने आई कि इन हथियारों को आगे कश्मीर पहुंचाया जाना था।
पुलिस अब बरामद हथियारों के स्रोत और उन्हें आगे पहुंचाने वाले लोगों की पहचान करने में जुटी है।
नाबालिगों को बनाया जा रहा था मोहरा
जांच में नाबालिगों की भूमिका सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। प्रारंभिक पूछताछ के आधार पर बताया गया है कि इन युवकों का इस्तेमाल हथियारों की आवाजाही के लिए किया जा रहा था।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि नाबालिगों को इस आपराधिक नेटवर्क में किसने शामिल किया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि उन्हें किस तरह प्रभावित किया गया और हथियारों की तस्करी के लिए तैयार किया गया।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नाबालिगों को आगे करके आपराधिक नेटवर्क अपनी गतिविधियों को सुरक्षा जांच से बचाने की कोशिश कर सकते हैं।
जेल में बंद गैंगस्टरों से जुड़े तार
जांच के दौरान इस नेटवर्क के तार जेल में बंद कुछ गैंगस्टरों से जुड़े होने की जानकारी भी सामने आने की बात कही जा रही है। यदि जांच में यह कड़ी पुष्ट होती है, तो मामला केवल स्थानीय स्तर पर हथियारों की तस्करी तक सीमित नहीं रहेगा।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि जेल में बंद आरोपियों की इस नेटवर्क में क्या भूमिका थी और बाहर मौजूद लोगों के साथ उनका किस तरह संपर्क बना हुआ था।
इसके अलावा पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के संपर्क में रहे अन्य लोगों और उनके आपराधिक संबंधों की भी जानकारी जुटा रही है।
ड्रोन से सीमा पार पहुंचाए गए हथियारों की आशंका
जांच में एक महत्वपूर्ण पहलू सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार पहुंचाए जाने की आशंका से जुड़ा है। सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि बरामद हथियारों को ड्रोन के माध्यम से भारतीय क्षेत्र में पहुंचाया गया हो सकता है।
हालांकि, इस संबंध में जांच अभी जारी है और हथियारों के वास्तविक स्रोत की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि हथियार कहां से आए, सीमा पार से उन्हें किसने भेजा और भारतीय क्षेत्र में उन्हें किस नेटवर्क ने प्राप्त किया।
पाकिस्तान में बैठे संचालकों से संपर्क की जांच
पूरे मामले में सीमा पार बैठे संचालकों की संभावित भूमिका भी जांच के केंद्र में है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि पाकिस्तान में मौजूद संचालक स्थानीय अपराधियों और आपराधिक गिरोहों के माध्यम से जम्मू-कश्मीर में अपना नेटवर्क सक्रिय करने की कोशिश कर रहे हैं।
जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या सीमा पार से हथियारों की आपूर्ति के लिए स्थानीय युवाओं और आपराधिक गिरोहों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
यदि यह कड़ी पुष्ट होती है, तो यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक गंभीर चुनौती मानी जाएगी, क्योंकि इसमें सीमा पार से हथियार भेजने और स्थानीय स्तर पर उनके वितरण के लिए अलग-अलग स्तर के नेटवर्क के इस्तेमाल की आशंका है।
कश्मीर तक हथियार पहुंचाने का क्या था मकसद?
जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बरामद हथियारों को कश्मीर क्यों भेजा जाना था। क्या इनका इस्तेमाल किसी आपराधिक वारदात के लिए होना था या किसी बड़े नेटवर्क को मजबूत करने की योजना थी?
इसी के साथ यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और इसके तार जम्मू से आगे कश्मीर के किन इलाकों तक जुड़े हैं।
फिलहाल पुलिस की कार्रवाई से हथियारों की खेप को आगे पहुंचाने की कथित कोशिश नाकाम हुई है। जांच अब तीन पिस्तौल और छह कारतूस की बरामदगी से आगे बढ़कर पूरे नेटवर्क की पड़ताल पर केंद्रित है। सीमा क्षेत्र से लेकर जम्मू और संभावित रूप से कश्मीर तक इस नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।




