कछौना क्षेत्र मे ड्रेनों की सफाई न होने से दर्जनों गांवों में जलभराव, सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न


हरदोई( वेबवार्ता)विकासखंड कछौना क्षेत्र में ड्रेनों की समय से सफाई न होने के कारण दर्जनों गांवों में जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। समसपुर ड्रेन की करीब तीन वर्षों से सफाई न होने के चलते जल निकासी बाधित है। इससे जहां सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई है, वहीं कई गांवों में आवागमन और जनजीवन प्रभावित हो रहा है। समस्या को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।
समसपुर ड्रेन बघौली थाने के पीछे बरौली से निकलकर कुशालपुर, पहाड़पुर, मरेउरा, मतुआ, बनियनखेड़ा, त्योरी, भीरीघाट, भवानीपुर, समसपुर, कन्हैआ, बालामऊ, महेशनमढ़िया, पनुआ और गोसवा होते हुए सई नदी में गिरती है। लंबे समय से सफाई न होने के कारण ड्रेन में जगह-जगह जलकुंभी, पेड़-पौधों की टहनियां, जंगल और झाड़ियां उग आई हैं। इससे पानी की निकासी प्रभावित है और बरसात के दौरान पानी सड़कों तथा आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच रहा है।
जलभराव के कारण मक्का, धान और तिल्ली की सैकड़ों बीघा फसल प्रभावित हुई है। ग्राम मतुआ से पूरवा जाने वाले मार्ग पर पानी का तेज बहाव होने से ग्रामीणों का आवागमन बाधित है। वहीं मतुआ गांव के आबादी क्षेत्र में पानी पहुंचने से कई मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है।
समस्या से परेशान सैकड़ों ग्रामीण कुछ दिन पूर्व कोतवाली कछौना पहुंचे थे और ड्रेन की तत्काल सफाई कराने की मांग की थी।
कछौना ड्रेन की भी स्थिति खराब
कछौना कस्बे से होकर गुजरने वाली कछौना ड्रेन की स्थिति भी चिंताजनक है। कई वर्षों से सफाई न होने के कारण कई स्थानों पर यह ड्रेन नाली के रूप में सिमट गई है। बरसात में जल निकासी बाधित होने से कछौना कस्बे के कई मोहल्लों और मुख्य मार्ग पर जलभराव की स्थिति बन जाती है।
यह ड्रेन कछौना कस्बे से होते हुए पलिया डीह, शारदा नहर और लखनऊ ब्रांच के नीचे से गुजरते हुए भुलाईखेड़ा, हरिचंदापुर, कलौली, मढ़िया और पैरा होते हुए सई नदी में गिरती है। दोनों ड्रेनों में बने साइफन की सफाई न होने से जल निकासी की समस्या और गंभीर हो गई है। इसके अलावा आसपास के लोगों द्वारा मछली पकड़ने के लिए ड्रेन में जाल लगाए जाने से भी पानी के प्रवाह में बाधा उत्पन्न होने की बात सामने आ रही है।
किसानों और ग्रामीणों की समस्या को लेकर राष्ट्रीय जल प्रबंधन खंड-2 के सहायक अभियंता अमित वर्मा ने बताया कि शीघ्र ही अधिकारियों को मौके पर भेजकर स्थलीय जांच कराई जाएगी। इसके बाद मशीन लगाकर ड्रेन की विधिवत सफाई कराने का प्रयास किया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को जलभराव की समस्या से निजात दिलाई जा सके।

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