उन्नाव, 27 मई (वेब वार्ता)। दिल्ली से गोरखपुर जा रही प्राइवेट स्लीपर बस के लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर पलटने की घटना में सामने आए नए विवरण हादसे की भयावहता को और गहरा कर रहे हैं। तेज रफ्तार और चालक को आई कथित झपकी इस दुर्घटना की बड़ी वजह मानी जा रही है। हादसे में सात यात्रियों की मौत हो चुकी है, जबकि 24 घायल अभी भी लखनऊ स्थित अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों धनंजय, धीरज और अरुण के अनुसार हादसे के समय बस अत्यधिक तेज गति से चल रही थी। उनका कहना है कि बस की रफ्तार करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटा रही होगी। एक्सप्रेसवे पर अंडरपास के पास बस का दाहिना हिस्सा डिवाइडर पर चढ़ गया और पुलिया से टकराने के बाद वाहन बाईं ओर पलट गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस पलटने के बाद काफी दूरी तक घिसटती चली गई।
हादसे की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक्सप्रेसवे किनारे लगी लोहे की सुरक्षा ग्रिल भी टूट गई। कई यात्री उछलकर सड़क से लगभग 30 फीट नीचे खंती में जा गिरे, जिससे घटनास्थल पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। दुर्घटना के बाद यातायात भी प्रभावित हुआ और करीब डेढ़ घंटे तक वाहनों की आवाजाही बाधित रही।
घटना के बाद यूपीडा और पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य संभाला। मुख्य सुरक्षा अधिकारी प्रभात कुमार अवस्थी, सुरक्षा अधिकारी आरके चंदेल, सहायक सुरक्षा अधिकारी चंद्रप्रकाश वर्मा और अलीशेर खान की निगरानी में यात्रियों का बिखरा सामान हटाया गया और क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर यातायात सामान्य कराया गया।
हालांकि प्रत्यक्षदर्शियों ने राहत कार्य में देरी का भी आरोप लगाया है। उनके मुताबिक दुर्घटना के करीब आधे घंटे बाद पुलिस और यूपीडा की टीमें मौके पर पहुंचीं, जिसके बाद बचाव कार्य शुरू हो सका। लगभग 20 एंबुलेंसों के जरिए घायलों को स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, लेकिन वहां भी पर्याप्त चिकित्सकीय स्टाफ उपलब्ध नहीं था, जिससे कई घायल दर्द से तड़पते रहे।
बताया गया कि घायलों को जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, उस समय वहां सीमित स्टाफ मौजूद था। बाद में अस्पताल प्रभारी और अन्य स्वास्थ्यकर्मी पहुंचे, तब उपचार व्यवस्था कुछ हद तक व्यवस्थित हो सकी। इस दौरान गंभीर रूप से घायल यात्रियों को बेहतर इलाज के लिए लखनऊ के आघात केंद्र भेजा गया।
बस में सवार यात्रियों बृजेश कुमार और विनय यादव ने बताया कि दुर्घटना से लगभग आधा घंटा पहले चालक को झपकी आने के कारण बस एक कार से टकराने से बाल-बाल बची थी। उस समय यात्रियों में भी घबराहट फैल गई थी। यात्रियों के अनुसार, इसके बाद दूसरे चालक ने बस की कमान संभाली, लेकिन कुछ ही देर बाद यह बड़ा हादसा हो गया।
दुर्घटना में कई यात्रियों को गंभीर चोटें आई हैं। किसी के सिर और चेहरे पर गहरी चोटें हैं तो कई यात्रियों के हाथ, पैर और छाती बुरी तरह घायल हुए हैं। कुछ घायलों में फ्रैक्चर और आंतरिक चोटों की भी पुष्टि हुई है। मृतकों और घायलों की स्थिति ने हादसे की भयावह तस्वीर सामने रख दी है।
पुलिस और प्रशासन ने दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि चालक की स्थिति, वाहन की तकनीकी हालत और अन्य परिस्थितियों की जांच की जा रही है। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




