लखनऊ | अजय कुमार | वेब वार्ता
Lucknow Coaching Fire Tragedy में मौत के मुंह से बाहर निकलने वाले छात्र आसिफ ने हादसे को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आसिफ का दावा है कि वर्ष 2024 में भी इसी इमारत में शॉर्ट सर्किट की घटना हुई थी, जिसके बाद अफरा-तफरी मच गई थी और दो दिनों के लिए कोचिंग बंद करनी पड़ी थी। उनका कहना है कि यदि उस समय जिम्मेदार लोगों ने सुरक्षा व्यवस्थाओं को गंभीरता से लिया होता तो इस दर्दनाक हादसे में 15 छात्रों की जान नहीं जाती।
आसिफ ने बताया कि घटना के समय कुछ ही मिनटों में सभी छात्रों को यह एहसास हो गया था कि अब बचना मुश्किल है, क्योंकि मुख्य निकास मार्ग बाधित हो गया था और लोग अंदर फंस गए थे।
⚡ संक्षिप्त वार्ता (Quick Info)
- हादसे से बचे छात्र आसिफ ने किया बड़ा खुलासा
- 2024 में भी इमारत में हुआ था शॉर्ट सर्किट
- दो साल पहले ऊपरी गेट पर लगाया गया था मजबूत ताला
- छात्रों ने खिड़की तोड़कर बचाई जान
- 15 छात्रों की मौत से सदमे में है पूरा परिसर
‘पहले भी हुआ था शॉर्ट सर्किट’
आसिफ के अनुसार मई-जून 2024 में भी इमारत में शॉर्ट सर्किट की घटना हुई थी। उस दौरान पूरे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था और एहतियातन दो दिनों तक छुट्टी घोषित कर दी गई थी।
उन्होंने कहा कि यदि उस समय सुरक्षा खामियों को दूर कर लिया गया होता और आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम किए गए होते, तो इतने बड़े हादसे को रोका जा सकता था।
आसिफ का दावा“उसी समय अगर जिम्मेदारों ने सबक लिया होता तो हमारे 15 साथियों की जान नहीं जाती।”
‘दो साल से बंद था ऊपरी गेट’
आसिफ ने बताया कि इमारत के ऊपरी हिस्से में स्थित एक महत्वपूर्ण निकास द्वार पर लगभग दो वर्ष पहले मजबूत ताला लगा दिया गया था। आपात स्थिति में यह रास्ता छात्रों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकता था, लेकिन हादसे के समय वह बंद मिला।
उन्होंने कहा कि आग लगने के बाद कुछ ही मिनटों में पूरे परिसर में धुआं भर गया और बाहर निकलने के रास्ते सीमित हो गए।
| आसिफ के प्रमुख दावे | विवरण |
|---|---|
| पहली घटना | 2024 में शॉर्ट सर्किट हुआ था |
| ऊपरी गेट | दो साल पहले से ताले से बंद |
| बचाव का तरीका | खिड़की तोड़कर बाहर निकले |
| मृतकों की संख्या | 15 छात्र |
खिड़की तोड़कर बचाई जान
आसिफ ने बताया कि जब मुख्य निकास मार्ग से बाहर निकलना संभव नहीं रहा, तब कुछ छात्रों ने साहस दिखाते हुए खिड़की तोड़ी। इसके बाद इंटरनेट केबल के सहारे नीचे उतरकर उन्होंने अपनी जान बचाई।
हालांकि उनके कई साथी धुएं और आग के बीच अंदर ही फंस गए और बाहर नहीं निकल सके।
भावुक हुए आसिफआसिफ ने कहा, “मैं बच तो गया हूं, लेकिन अंदर से पूरी तरह टूट गया हूं। हमारे 15 साथी हमारे सामने हमेशा के लिए चले गए। यह दर्द जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे।”
जांच और जवाबदेही पर उठ रहे सवाल
हादसे के बाद सुरक्षा मानकों, फायर सेफ्टी व्यवस्था और इमारत में मौजूद आपातकालीन निकास मार्गों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित परिवारों और स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासनिक और जांच एजेंसियां हादसे के कारणों, सुरक्षा खामियों तथा प्रबंधन की भूमिका की जांच कर रही हैं।
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