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Ambikapur Furniture Scam: करोड़ों के फर्नीचर घोटाले में एसीबी की बड़ी कार्रवाई, राजीव गांधी शिक्षा मिशन कार्यालय में दबिश

अम्बिकापुर | संवाददाता | वेब वार्ता

Ambikapur Furniture Scam मामले में वर्षों से लंबित जांच ने बुधवार को अचानक रफ्तार पकड़ ली, जब एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर स्थित जिला परियोजना कार्यालय, राजीव गांधी शिक्षा मिशन (समग्र शिक्षा) में दबिश दी। वर्ष 2011-12 में हुए कथित करोड़ों रुपये के फर्नीचर घोटाले से जुड़े दस्तावेजों की जांच के लिए पहुंची टीम ने कार्यालय में मौजूद फाइलों, कंप्यूटर रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल दस्तावेजों को खंगालना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि लंबे समय से आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण एसीबी को यह सख्त कदम उठाना पड़ा।

⚡ संक्षिप्त वार्ता (Quick Info)

  • अम्बिकापुर के राजीव गांधी शिक्षा मिशन कार्यालय में एसीबी की दबिश।
  • वर्ष 2011-12 के चर्चित फर्नीचर घोटाले की जांच तेज हुई।
  • महत्वपूर्ण फाइलों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच शुरू।
  • कई दस्तावेजों को जब्त करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
  • 11-12 अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम पहले सामने आ चुके हैं।
  • करीब 12 फर्मों की संलिप्तता की भी जांच जारी है।

Ambikapur Furniture Scam में एसीबी की कार्रवाई क्यों हुई?

सूत्रों के अनुसार, एसीबी लंबे समय से इस मामले से जुड़े दस्तावेजों की मांग कर रही थी, लेकिन विभाग की ओर से आवश्यक रिकॉर्ड समय पर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे थे। इसी वजह से जांच एजेंसी ने सीधे कार्यालय पहुंचकर दस्तावेजों की जांच और जब्ती की कार्रवाई शुरू की।

एसीबी की टीम ने कार्यालय में मौजूद विभिन्न शाखाओं से संबंधित रिकॉर्ड खंगाले और फर्नीचर खरीद से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों की भी जांच की। इस दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई गई हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

फर्नीचर घोटाले का मामला इतना गंभीर क्यों माना जा रहा है?यह मामला सरकारी शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपये की खरीद प्रक्रिया से जुड़ा है। आरोप है कि फर्नीचर खरीद में नियमों की अनदेखी कर वित्तीय अनियमितताएं की गईं, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। इसी कारण इसे प्रदेश के चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में गिना जाता है।

हार्ड कॉपी से लेकर डिजिटल रिकॉर्ड तक की हो रही जांच

एसीबी की टीम केवल भौतिक दस्तावेजों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कंप्यूटर सिस्टम, डिजिटल फाइलों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की भी गहन जांच कर रही है। जांच अधिकारियों का मानना है कि कई महत्वपूर्ण साक्ष्य डिजिटल माध्यमों में सुरक्षित हो सकते हैं।

मामले से जुड़े दस्तावेजों को सुरक्षित रखने और जांच को मजबूत करने के लिए आवश्यक रिकॉर्ड जब्त किए जा रहे हैं। इससे आने वाले दिनों में कई नए तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

जांच का बिंदुविवरण
मामलाफर्नीचर खरीद घोटाला
अवधिवर्ष 2011-12
जांच एजेंसीएंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी)
संदिग्ध अधिकारी11-12 अधिकारी एवं कर्मचारी
संबंधित फर्मेंकरीब 12 व्यावसायिक फर्में
कार्रवाईदस्तावेजों की जांच एवं जब्ती

किन धाराओं के तहत दर्ज है मामला?

फर्नीचर घोटाले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120(बी) (आपराधिक षड्यंत्र) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1) तथा 13(2) के तहत अपराध दर्ज किया गया था।

इन धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। इसी वजह से इस मामले की जांच को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जांच तेज होने का आगे क्या असर पड़ सकता है?एसीबी द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच के बाद मामले में नई गिरफ्तारी, पूछताछ या अतिरिक्त आरोप तय होने की संभावना बढ़ गई है। यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो लंबे समय से लंबित इस मामले में बड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

विभाग में मचा हड़कंप

कार्यालय में एसीबी की अचानक हुई कार्रवाई के बाद विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों में हड़कंप का माहौल है। कई कर्मचारी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और जांच की दिशा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतने वर्षों बाद जांच में आई तेजी से मामले की परतें खुल सकती हैं और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो सकती है। अब सभी की नजर एसीबी की अगली कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है।

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