तमिलनाडु में विजय युग की शुरुआत, मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर रचा नया राजनीतिक इतिहास

चेन्नई, 10 मई (वेब वार्ता)। तमिलनाडु की राजनीति में रविवार को एक नए दौर की शुरुआत हो गई, जब अभिनेता से राजनेता बने तमिलगा वेट्री कझगम के संस्थापक सी. जोसेफ विजय ने राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। लंबे समय से द्रमुक और अन्नाद्रमुक के बीच सिमटी तमिलनाडु की राजनीति में यह परिवर्तन ऐतिहासिक माना जा रहा है। विजय ने अपनी पहली ही चुनावी पारी में शानदार सफलता हासिल करते हुए प्रदेश की सत्ता तक पहुंचने का नया इतिहास रच दिया।

चेन्नई स्थित जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में आयोजित सादे लेकिन भव्य समारोह में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने विजय को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उनके साथ मंत्रिमंडल के नौ अन्य सदस्यों ने भी शपथ ली। मंत्रियों में एन. आनंद, आधव अर्जुन, के.ए. सेनगोटियां, डॉ. के.जी. अरुणराज, पी. वेंकटरमणन, आर. निर्मल कुमार, राजमोहन, डॉ. टी.के. प्रभु और एस. कीर्तना शामिल हैं। सभी मंत्रियों ने तमिल भाषा में ईश्वर के नाम पर शपथ ग्रहण की।

vijay-takes-oath-as-tamil-nadu-chief-ministerशपथ ग्रहण समारोह के दौरान जैसे ही सी. जोसेफ विजय का नाम पुकारा गया, पूरा स्टेडियम तालियों और नारों से गूंज उठा। विजय ने पारंपरिक तमिल वेशभूषा के स्थान पर सफेद शर्ट, काली पैंट और काले कोट में शपथ लेकर अलग संदेश देने का प्रयास किया। समारोह में बड़ी संख्या में समर्थकों और राजनीतिक हस्तियों की मौजूदगी ने इस अवसर को और विशेष बना दिया।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी इस समारोह में विशेष रूप से उपस्थित रहे। मंच पर विजय के साथ उनकी मौजूदगी ने दोनों नेताओं के बीच बढ़ती राजनीतिक निकटता को स्पष्ट संकेत दिया। समारोह के दौरान दोनों नेताओं ने मंच साझा किया और आत्मीय बातचीत करते दिखाई दिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण भारत की राजनीति में यह नया समीकरण भविष्य में राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है।

vijay-takes-oath-as-tamil-nadu-chief-ministerविधानसभा चुनाव में तमिलगा वेट्री कझगम ने 108 सीटों पर जीत दर्ज की। विजय स्वयं दो सीटों से विजयी हुए, जिसके चलते प्रभावी रूप से पार्टी के पास 107 विधायक ही रहे। बहुमत के लिए आवश्यक संख्या से पीछे रहने के कारण कांग्रेस ने निर्णायक भूमिका निभाई। कांग्रेस के अलावा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और वीसीके ने भी विजय को समर्थन दिया। इन दलों के समर्थन के बाद राज्य में सरकार गठन का रास्ता साफ हुआ।

राजनीतिक दृष्टि से यह भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि तमिलनाडु में पहली बार किसी गठबंधन सरकार का गठन हुआ है। कांग्रेस के पांच विधायकों और अन्य सहयोगी दलों के समर्थन ने विजय सरकार को स्थिर बहुमत प्रदान किया। शनिवार शाम विजय सहयोगी दलों के समर्थन पत्र लेकर राजभवन पहुंचे थे, जिसके बाद राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया।

सूत्रों के अनुसार, विजय और राहुल गांधी के बीच संबंध लंबे समय से बने हुए हैं। बताया जाता है कि वर्ष 2009 में विजय ने कांग्रेस के साथ जुड़ने की इच्छा जताई थी। अब राजनीतिक परिस्थितियां ऐसी बनीं कि वही कांग्रेस विजय के नेतृत्व वाली सरकार की प्रमुख सहयोगी बन गई है। विजय ने गठबंधन सहयोगियों की बैठक में कहा कि कठिन समय में कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उन पर भरोसा जताया था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी विजय को दक्षिण भारत में एक मजबूत धर्मनिरपेक्ष नेतृत्व के रूप में देख रहे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान भी कांग्रेस ने विजय के प्रति नरम रुख अपनाया था और द्रमुक के साथ रिश्तों में दूरी दिखाई दी थी। अब राज्य में द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन समाप्त माना जा रहा है।

शपथ ग्रहण समारोह में विजय के पिता एस.ए. चंद्रशेखर और माता शोभा चंद्रशेखर भी मौजूद रहे। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, उद्योग जगत की हस्तियां, फिल्म कलाकार और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी समारोह में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’, ‘राष्ट्रगान’ और ‘तमिल थाई वाज़्थु’ के गायन से हुई।

समारोह स्थल के बाहर भी भारी उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में समर्थक सुबह से ही सड़कों के किनारे एकत्र हो गए थे। जनता की सुविधा के लिए विभिन्न स्थानों पर विशाल एलसीडी स्क्रीन लगाकर शपथ ग्रहण समारोह का सीधा प्रसारण किया गया, ताकि अधिक से अधिक लोग इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बन सकें।

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