नई दिल्ली, 10 मई (वेब वार्ता)। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, 15 मई से पहले तेल कंपनियां ईंधन की कीमतों में बड़ा बदलाव कर सकती हैं। इससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। कुछ समय पहले तक करीब 70 डॉलर प्रति बैरल बिकने वाला कच्चा तेल अब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े संकट ने वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित किया है, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर पड़ रहा है।
सूत्रों का कहना है कि सरकारी तेल कंपनियों पर लगातार वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां वर्तमान में पेट्रोल और डीजल पर भारी अंडर-रिकवरी झेल रही हैं। बताया जा रहा है कि कंपनियां पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये और डीजल पर करीब 30 रुपये प्रति लीटर का अतिरिक्त बोझ स्वयं वहन कर रही हैं। इसके चलते हर महीने हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जानकारों के अनुसार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की जा सकती है। इसके साथ ही घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में भी 40 से 50 रुपये तक की वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। वर्ष 2022 के बाद से ईंधन की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया था, लेकिन अब तेल कंपनियों के लिए बढ़ती लागत को संभालना कठिन होता जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर भी ईंधन संकट गहराता दिखाई दे रहा है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि बांग्लादेश में ईंधन राशनिंग लागू की गई है। पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों में ऊर्जा संकट के कारण कामकाजी दिनों में कटौती तक करनी पड़ी है। इसके मुकाबले भारत ने अब तक स्थिति को अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से नियंत्रित रखा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र सरकार ने पहले एक्साइज ड्यूटी में कटौती और रूस, अमेरिका तथा पश्चिमी अफ्रीका जैसे देशों से कच्चे तेल के आयात को बढ़ाकर स्थिति संभालने का प्रयास किया था। भारतीय रिफाइनरियां भी अधिकतम क्षमता से काम कर रही हैं, लेकिन वैश्विक आपूर्ति मार्गों में बाधा और लगातार बढ़ती कीमतों के कारण दबाव बढ़ता जा रहा है।
आर्थिक जानकारों के मुताबिक यदि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो इसका सीधा असर परिवहन, खाद्य पदार्थों और दैनिक जरूरत की वस्तुओं पर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में महंगाई दर पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।




