हैदराबाद में प्रधानमंत्री मोदी और रेवंत रेड्डी के बीच दिलचस्प संवाद, गठबंधन प्रस्ताव की चर्चा तेज

हैदराबाद, 10 मई (वेब वार्ता)। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के बीच हुई बातचीत ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। विकास मॉडल और केंद्र की सहायता को लेकर दोनों नेताओं के बीच मंच से हुई टिप्पणी पर सभागार में मौजूद लोग भी मुस्कुराने लगे।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए किए गए कार्यों की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जब केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार थी और नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब गुजरात ने विकास का एक प्रभावशाली मॉडल प्रस्तुत किया था। रेवंत रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना की जनता भी अब वैसी ही विकासात्मक सहायता और समर्थन की अपेक्षा केंद्र सरकार से कर रही है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि गुजरात ने एक दशक के भीतर जिस तरह आधारभूत ढांचे, निवेश और प्रशासनिक सुधारों के जरिए खुद को एक मजबूत राज्य के रूप में स्थापित किया, उसी प्रकार तेलंगाना भी तेजी से आगे बढ़ना चाहता है। उन्होंने संकेतों में केंद्र से अधिक सहयोग और संसाधनों की मांग भी रखी।

रेवंत रेड्डी की टिप्पणी के जवाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से हल्के अंदाज में लेकिन राजनीतिक संदेश के साथ प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि तेलंगाना को वही हिस्सा दिया जाए जो गुजरात को मिला था, तो इससे राज्य का नुकसान हो सकता है, क्योंकि वर्तमान में तेलंगाना को उससे कहीं अधिक सहायता मिल रही है। प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी पर कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोग हंस पड़े।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि केंद्र सरकार तेलंगाना के विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है और भविष्य में भी हरसंभव सहयोग जारी रहेगा। इसी दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को अपने साथ गठबंधन करने की सलाह भी दे डाली। प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी को राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान दोनों नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल दिखाई दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी भले ही हल्के अंदाज में की गई हो, लेकिन इसके पीछे राजनीतिक संदेश भी छिपा हुआ था। तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद भाजपा लगातार राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रही है।

उधर, कांग्रेस और भाजपा के बीच बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की यह सार्वजनिक बातचीत चर्चा का विषय बन गई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में तेलंगाना की राजनीति में केंद्र और राज्य सरकारों के संबंध अहम भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और उद्योग जगत से जुड़े लोग उपस्थित रहे। विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और नई योजनाओं की घोषणा के साथ-साथ मंच से हुई यह राजनीतिक नोकझोंक भी पूरे कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण बन गई।

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