चंडीगढ़/नई दिल्ली, 22 मई (वेब वार्ता)। पंजाब सरकार ने लावारिस और जानलेवा कुत्तों की बढ़ती समस्या को देखते हुए विशेष अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सामाजिक माध्यमों पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह अभियान सार्वजनिक सुरक्षा और लोगों के जीवन की रक्षा के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। हाल के वर्षों में डॉग बाइट और रेबीज के मामलों में वृद्धि को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है।
सरकार का कहना है कि अभियान का मुख्य उद्देश्य उन लावारिस कुत्तों पर कार्रवाई करना है जो बच्चों और राहगीरों के लिए गंभीर खतरा बन रहे हैं। यह पहल सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद शुरू की गई है, जिसमें कहा गया था कि रेबीज से संक्रमित, लाइलाज बीमारी से ग्रस्त या अत्यधिक आक्रामक और खतरनाक कुत्तों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि गरिमापूर्ण जीवन जीने के संवैधानिक अधिकार में नागरिकों का बिना भय और हमलों के सार्वजनिक स्थानों पर स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार भी शामिल है। अदालत ने राज्यों और स्थानीय निकायों को लावारिस कुत्तों की समस्या से प्रभावी तरीके से निपटने के निर्देश दिए हैं।
पंजाब में बीते कुछ वर्षों के दौरान कुत्तों के काटने की घटनाओं में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में डॉग बाइट के ढाई लाख से अधिक मामले सामने आए, जबकि 2024 में यह संख्या 2.13 लाख रही थी। बढ़ते मामलों ने सरकार और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
इसी समस्या के समाधान के लिए पंजाब सरकार ने जनवरी में लुधियाना में राज्य की पहली डॉग सैंक्चुअरी शुरू की थी। लगभग 500 कुत्तों की क्षमता वाली इस सैंक्चुअरी को पायलट परियोजना के रूप में विकसित किया गया है। सरकार का कहना है कि इसके अनुभव के आधार पर प्रदेश के अन्य शहरों में भी इसी प्रकार की सुविधाएं स्थापित की जाएंगी।
हालांकि विशेषज्ञों और पशु अधिकार समूहों का कहना है कि नसबंदी और आश्रय केंद्रों की व्यवस्था दीर्घकालिक समाधान का अहम हिस्सा बनी रहनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने निर्देशों में कानूनी प्रक्रिया और पशु कल्याण नियमों के पालन पर जोर दिया है।
सरकार के इस अभियान को सार्वजनिक सुरक्षा और पशु प्रबंधन दोनों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इसकी प्रभावशीलता और जमीनी परिणामों पर नजर बनी रहेगी।




