नई दिल्ली, 22 मई (वेब वार्ता)। भारत सरकार पाकिस्तान और बांग्लादेश से सटी सीमाओं की सुरक्षा को नई तकनीकी ताकत देने की तैयारी में है। सीमा सुरक्षा बल के एक कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘स्मार्ट बॉर्डर’ परियोजना का ऐलान करते हुए कहा कि अगले एक वर्ष के भीतर करीब छह हजार किलोमीटर लंबी संवेदनशील सीमाओं पर आधुनिक तकनीक आधारित सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाएगा।
यह परियोजना सीमा सुरक्षा का डिजिटल और उच्च तकनीक आधारित स्वरूप मानी जा रही है। इसके तहत पारंपरिक निगरानी के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता, लेजर कैमरे, ड्रोन, रडार और सेंसर आधारित प्रणाली को जोड़ा जाएगा, जिससे घुसपैठ, तस्करी और सीमा पार गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा सकेगी।
‘स्मार्ट बॉर्डर’ प्रणाली में कई अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। सीमा के संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन और रडार के जरिए हवाई निगरानी होगी, जबकि थर्मल इमेजर घने कोहरे और अंधेरे में भी मानव गतिविधियों की पहचान कर सकेंगे। हाई-रिजॉल्यूशन स्मार्ट कैमरे संदिग्ध गतिविधियों को रिकॉर्ड करेंगे और जमीन तथा जल क्षेत्रों में लगाए जाने वाले सेंसर किसी भी असामान्य हलचल की जानकारी तुरंत देंगे।
परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण प्रणाली होगी। सीमा पर लगे कैमरे और रडार से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण एआई करेगा और यह जानवर, इंसान तथा हथियारों से लैस ड्रोन के बीच अंतर पहचान सकेगा। किसी भी खतरे की स्थिति में नियंत्रण कक्ष को तुरंत चेतावनी भेजी जाएगी, जिससे जवान तत्काल कार्रवाई कर सकेंगे।
नदी और दलदली इलाकों में, जहां पारंपरिक तारबंदी संभव नहीं है, वहां लेजर आधारित अदृश्य सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी। इसके अलावा भूमिगत सेंसर सुरंग या जमीन के नीचे होने वाली गतिविधियों और कंपन को भी पकड़ सकेंगे। सभी प्रणालियों को एक केंद्रीकृत नियंत्रण केंद्र से जोड़ा जाएगा, जहां से चौबीसों घंटे वास्तविक समय में निगरानी की जाएगी।
सरकार इस परियोजना को मौजूदा व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली के उन्नत स्वरूप के रूप में विकसित कर रही है। गृह मंत्रालय पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा जैसे सीमावर्ती राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है, ताकि अवैध घुसपैठ और तस्करी को प्रभावी रूप से रोका जा सके।
इस परियोजना की आवश्यकता पर बल देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सीमाओं की बदलती चुनौतियों और ड्रोन आधारित तस्करी के बढ़ते खतरे को देखते हुए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल जरूरी हो गया है। उन्होंने सीमा सुरक्षा बल के जवानों से कहा कि देश की सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम बंगाल और असम के नदी क्षेत्रों, गुजरात के दलदली हिस्सों तथा घनी आबादी वाले सीमावर्ती इलाकों में मानवीय गश्त कई बार चुनौतीपूर्ण होती है। ऐसे में तकनीक आधारित यह ‘स्मार्ट बॉर्डर’ परियोजना सीमा सुरक्षा की तस्वीर बदल सकती है और घुसपैठ व तस्करी के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित हो सकती है।




