NSA अजित डोभाल के समर्थन में उतरे केंद्रीय मंत्री, ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ की; बोले—GEN Z पढ़ाई और करियर पर ध्यान दे
नई दिल्ली | वेबवार्ता
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें देश में अशांति पैदा करने वाला बताया है। वरिष्ठ पत्रकार एवं IdealNewz के संपादक इरफान शेख से बातचीत में आठवले ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) पर सवाल उठाकर राहुल गांधी ने देश को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और अखंडता की रक्षा के लिए लगातार काम करने वाले डोभाल को खलनायक के रूप में पेश करना अनुचित है।
मंत्री ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “असली विलेन राहुल गांधी हैं।” उनके मुताबिक, राहुल गांधी देश में अशांति पैदा कर रहे हैं और अपने पद की गरिमा को भी ठेस पहुंचा रहे हैं।
पहलगाम हमले का जिक्र, NSA की भूमिका की सराहना
रामदास आठवले ने अपने बयान में पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख किया, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की भूमिका महत्वपूर्ण रही है और उनके काम को राजनीतिक आरोपों के आधार पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए।
आठवले ने ऑपरेशन सिंदूर की भी सराहना की। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान में पाकिस्तान की आतंकवादी व्यवस्था की कमर तोड़ने के लिए बड़ी कार्रवाई की गई और लगभग 100 आतंकवादियों को मार गिराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि कार्रवाई में किसी नागरिक को निशाना नहीं बनाया गया।
मंत्री के इन दावों को उनके बयान के रूप में देखा जाना चाहिए; अभियान में मारे गए आतंकवादियों की संख्या और नागरिक हताहतों से संबंधित विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
जंतर-मंतर के पहले प्रदर्शन को बताया जायज, दूसरे पर उठाए सवाल
GEN Z के विरोध-प्रदर्शनों पर अपनी राय रखते हुए आठवले ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुआ पहला प्रदर्शन जायज था, क्योंकि उसमें अभिजीत दीपके ने पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार जैसे मुद्दे उठाए थे।
हालांकि, उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर किए गए दूसरे प्रदर्शन को अनुचित बताया। उनके अनुसार, परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग और संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी के इस्तीफे की मांग दो अलग-अलग विषय हैं, जिन्हें एक ही नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
आठवले ने युवाओं से अपील की कि वे विरोध-प्रदर्शनों के बजाय अपनी पढ़ाई, करियर और भविष्य पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अच्छा प्रदर्शन करके अपने माता-पिता का सम्मान बढ़ाना चाहिए।
मंत्री ने अभिजीत दीपके और राहुल गांधी पर देश में अशांति का माहौल बनाने का आरोप भी लगाया।
अपने संघर्ष के दिनों को किया याद
रामदास आठवले ने अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने एक कार्यकर्ता के रूप में दलितों और मजदूरों पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आंदोलन किए थे। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस शासन के दौरान विरोध-प्रदर्शन करने के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और आंदोलन का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी भी समस्या का समाधान अराजकता पैदा करना नहीं हो सकता। पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है और विरोध करने वालों को भी लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए।
GEN Z के लिए संदेश: विरोध हो, लेकिन जिम्मेदारी के साथ
आठवले के बयान ने युवा आंदोलनों, चुनाव आयोग की जवाबदेही और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े राजनीतिक विमर्श को फिर चर्चा में ला दिया है। एक ओर पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दे युवाओं की वास्तविक चिंताओं से जुड़े हैं, वहीं दूसरी ओर संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता और जवाबदेही पर बहस लोकतंत्र का अहम हिस्सा है।
ऐसे में सवाल यह है कि क्या राजनीतिक दल युवाओं की समस्याओं का समाधान खोजने पर ध्यान देंगे या GEN Z के आंदोलनों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बनाया जाता रहेगा?
रामदास आठवले ने राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अब इस बहस का केंद्र यही है कि युवाओं की मांगों, संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाए।
वेबवार्ता रिपोर्ट | IdealNewz के संपादक इरफान शेख से रामदास आठवले की बातचीत पर आधारित।




