नई दिल्ली, 19 अप्रैल (वेब वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र के नाम दिए गए संबोधन को लेकर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सहित कई दलों के नेताओं ने इसे पक्षपातपूर्ण और राजनीतिक हमला बताते हुए प्रधानमंत्री की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री के संबोधन को लेकर कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि राष्ट्र के नाम संबोधन एक पवित्र और निष्पक्ष माध्यम होता है, जिसका उद्देश्य देश में आत्मविश्वास और एकजुटता बढ़ाना होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने इस मंच का उपयोग राजनीतिक विरोधियों पर हमला करने के लिए किया, जो अनुचित है।
जयराम रमेश ने इसे “दयनीय, पक्षपातपूर्ण और विवादास्पद” बताते हुए कहा कि यदि यह वास्तव में संकट की स्थिति थी तो प्रधानमंत्री को प्रेस वार्ता के माध्यम से अपनी बात रखनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा में हाल ही में हुई घटनाओं के बाद प्रधानमंत्री मीडिया का सामना करने से बच रहे हैं।
कांग्रेस नेता ने महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने संवैधानिक संशोधन की विफलता के लिए माफी मांगी, लेकिन महिलाओं के नाम पर लाए गए परिसीमन प्रस्ताव को लेकर अपनी मंशा स्पष्ट नहीं की। उन्होंने सवाल उठाया कि सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने में 30 महीने की देरी क्यों हुई।
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी प्रधानमंत्री के संबोधन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे “ड्रामाबाजी” करार देते हुए कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण पहले ही पारित और अधिसूचित हो चुका है, लेकिन सरकार इसे लागू करने में इच्छुक नहीं दिख रही। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार चाहे तो तुरंत एक तिहाई सीटें महिलाओं को दी जा सकती हैं।
वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री के भाषण में कांग्रेस के बार-बार उल्लेख पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस का नाम 59 बार लिया, जबकि महिलाओं का जिक्र बहुत कम किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं।
खरगे ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी महिलाओं के मुद्दों को लेकर गंभीर नहीं है, जबकि कांग्रेस हमेशा महिलाओं के अधिकारों के पक्ष में खड़ी रही है।
प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद उत्पन्न इस राजनीतिक विवाद ने एक बार फिर महिला आरक्षण और सरकार की नीतियों को लेकर बहस को तेज कर दिया है। विपक्ष के आरोपों और सरकार की मंशा को लेकर आने वाले समय में राजनीतिक माहौल और गर्म होने की संभावना है।



