नई दिल्ली, 19 अप्रैल (वेब वार्ता)। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा समुद्री मार्गों पर बढ़ती असुरक्षा के बीच केंद्र सरकार ने भारतीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12,980 करोड़ रुपये के “भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल” को मंजूरी दे दी है, जिससे भारतीय जहाजों को निरंतर बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराई जा सकेगी।
यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य के पास भारतीय जहाजों पर फायरिंग की खबर सामने आई है, जिससे वैश्विक समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस निर्णय की जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस योजना के तहत सरकार लगभग 12,980 करोड़ रुपये की संप्रभु गारंटी प्रदान करेगी। इसका उद्देश्य जहाजों को लगातार बीमा कवरेज उपलब्ध कराना और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाए रखना है।
मंत्रालय के अनुसार, यह घरेलू बीमा पूल वैश्विक अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव जैसी परिस्थितियों से निपटने में सहायक होगा। साथ ही इससे भारतीय जहाजों की विदेशी बीमा कंपनियों पर निर्भरता भी कम होगी।
यह बीमा पूल समुद्र से जुड़े विभिन्न जोखिमों को कवर करेगा, जिनमें जहाजों की संरचना और मशीनरी, माल ढुलाई, जहाज मालिक की जिम्मेदारी तथा युद्ध और संघर्ष से जुड़े खतरे शामिल हैं। इसके तहत उन जहाजों को भी सुरक्षा प्रदान की जाएगी जो किसी भी देश से भारत की ओर आ रहे हों, भले ही उन्हें जोखिम भरे समुद्री क्षेत्रों से होकर गुजरना पड़े।
इस योजना के लागू होने से भारतीय शिपिंग कंपनियों को कम प्रीमियम पर बीमा सुविधा मिलेगी। यदि किसी जहाज को युद्ध या संघर्ष की स्थिति में नुकसान होता है, तो इस फंड के माध्यम से मुआवजा दिया जाएगा, जिससे कंपनियों का जोखिम कम होगा और व्यापार प्रभावित नहीं होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बढ़ते तनाव को देखते हुए यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा समुद्री व्यापार पर निर्भर करता है, ऐसे में जहाजों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना समय की मांग बन गई है।



