होर्मुज संकट के बीच भारतीय टैंकर ‘देश गरिमा’ सुरक्षित पार, कई जहाज लौटे

तेहरान, 19 अप्रैल (वेब वार्ता)। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर ‘देश गरिमा’ सफलतापूर्वक इस संवेदनशील मार्ग को पार कर गया, जबकि फायरिंग की घटनाओं के बाद कम से कम चार जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा।

जहाज निगरानी आंकड़ों के अनुसार, ‘देश गरिमा’ ने शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया और शाम तक ओमान की खाड़ी की ओर आगे बढ़ता देखा गया। यह भारतीय नौवाहन निगम लिमिटेड का टैंकर है और मार्च की शुरुआत से इस मार्ग को पार करने वाला दसवां भारतीय जहाज बन गया है।

वहीं दूसरी ओर, सुरक्षा चिंताओं के चलते कई जहाजों को पीछे हटना पड़ा। तेल टैंकर ‘सनमार हेराल्ड’, ‘देश वैभव’, ‘देश विभोर’ और मालवाहक पोत ‘जग अर्नव’ ने ईरान की ओर से कथित फायरिंग के बाद अपना मार्ग बदल लिया।

बताया जा रहा है कि फारस की खाड़ी में अब भारतीय ध्वज वाले 14 जहाज फंसे हुए हैं। इनमें से कुछ जहाज सरकारी स्वामित्व वाली भारतीय नौवाहन निगम लिमिटेड के हैं, जबकि अन्य निजी कंपनियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।

समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ओमान के उत्तर-पूर्व में लगभग 20 समुद्री मील की दूरी पर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की नौकाओं द्वारा गोलीबारी की घटना सामने आई। इसी के बाद कई जहाजों ने एहतियात के तौर पर अपना रास्ता बदल लिया।

इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भारत में ईरानी राजदूत को तलब कर इस मामले पर गहरी चिंता व्यक्त की। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भारतीय जहाजों पर हुई गोलीबारी को लेकर विरोध दर्ज कराया और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि व्यापारिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा भारत के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्रालय ने यह भी याद दिलाया कि पहले ईरान भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करता रहा है और अब भी उसी सहयोग की अपेक्षा की जाती है।

भारत ने ईरान से आग्रह किया है कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर सुरक्षित आवाजाही बहाल करे, ताकि व्यापारिक गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रह सकें। इस बीच ईरानी राजदूत ने भारत की चिंताओं को अपने देश तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर व्यापक असर डाल सकता है।

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