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8वें वेतन आयोग की चंडीगढ़ में बैठक, फिटमेंट फैक्टर से लेकर डीए तक उठेंगी बड़ी मांगें

चंडीगढ़, 15 सितंबर (वेब वार्ता)। आठवें वेतन आयोग की बैठकों का सिलसिला आगे बढ़ रहा है। चेन्नई और पुडुचेरी के बाद अब आयोग चंडीगढ़ का रुख करेगा। चंडीगढ़ में 16 से 18 अगस्त के बीच होने वाली बैठक में उत्तर भारत के विभिन्न कर्मचारी संघों और पेंशनभोगी संगठनों के प्रतिनिधि आयोग के समक्ष अपनी मांगें और सुझाव रखेंगे। बैठक में फिटमेंट फैक्टर, महंगाई भत्ता और मकान किराया भत्ता समेत वेतन एवं पेंशन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठने की संभावना है।

चंडीगढ़ के बाद आयोग की अगली बैठक 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में प्रस्तावित है। कर्मचारी संगठनों को उम्मीद है कि इन बैठकों के माध्यम से उनकी प्रमुख मांगें सीधे आयोग के सामने रखी जा सकेंगी।

साल में चार बार महंगाई भत्ता बढ़ाने की मांग

केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता वर्तमान व्यवस्था के तहत वर्ष में दो बार, जनवरी और जुलाई में संशोधित किया जाता है। हालांकि, बढ़ती महंगाई को देखते हुए कई कर्मचारी संगठनों ने अब इसमें बदलाव की मांग की है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि महंगाई भत्ते की समीक्षा वर्ष में दो बार के बजाय चार बार की जानी चाहिए। यानी हर तीन महीने में महंगाई के प्रभाव का आकलन कर महंगाई भत्ते में संशोधन किया जाए। संगठनों का तर्क है कि इससे कर्मचारियों को लगातार बढ़ती महंगाई के प्रभाव से कुछ हद तक राहत मिल सकेगी।

25 प्रतिशत महंगाई भत्ता होने पर मूल वेतन में जोड़ने की मांग

राष्ट्रीय संयुक्त परामर्शदात्री तंत्र समेत कुछ कर्मचारी संगठनों ने यह मांग भी उठाई है कि जब महंगाई भत्ता 25 प्रतिशत तक पहुंच जाए तो उसे मूल वेतन में मिला दिया जाए।

इस व्यवस्था से मूल वेतन का आधार बढ़ जाएगा। इसके परिणामस्वरूप मकान किराया भत्ता, यात्रा भत्ता और अन्य वेतन संबंधी गणनाएं भी बढ़े हुए मूल वेतन के आधार पर हो सकती हैं। इससे कर्मचारियों के कुल वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना बन सकती है।

फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 60 प्रतिशत से अधिक बताया जा रहा है। ऐसे में इस मांग को आठवें वेतन आयोग के समक्ष महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल किया जा रहा है।

3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग

कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू करना भी शामिल है। फिटमेंट फैक्टर का सीधा संबंध कर्मचारियों के मूल वेतन के पुनर्निर्धारण से होता है।

संगठनों का कहना है कि अधिक फिटमेंट फैक्टर लागू होने से कर्मचारियों के मूल वेतन में वृद्धि होगी। इसके आधार पर विभिन्न भत्तों की गणना होने से कुल वेतन में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

हालांकि, 3.83 फिटमेंट फैक्टर को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। यह केवल कर्मचारी संगठनों की ओर से आयोग के समक्ष रखी जा रही मांगों का हिस्सा है।

हर पांच साल में वित्तीय उन्नयन की मांग

कर्मचारी संगठन वित्तीय उन्नयन की व्यवस्था में भी बदलाव चाहते हैं। उनकी मांग है कि वर्तमान दस वर्ष की अवधि के बजाय हर पांच वर्ष में वित्तीय उन्नयन दिया जाए।

इसका उद्देश्य कर्मचारियों को उनके सेवाकाल के दौरान नियमित रूप से वेतन वृद्धि और पदोन्नति के समान वित्तीय लाभ उपलब्ध कराना है। संगठनों का मानना है कि इससे लंबे समय तक एक ही पद पर कार्यरत कर्मचारियों को आर्थिक लाभ मिल सकेगा।

परिवार की इकाई पांच करने का प्रस्ताव

आठवें वेतन आयोग के सामने परिवार की इकाई से संबंधित मांग भी रखी जा रही है। कर्मचारी संगठनों के अनुसार, सातवें वेतन आयोग में परिवार की इकाई तीन सदस्यों को माना गया था। अब इसे बढ़ाकर पांच करने की मांग की जा रही है।

संगठनों का कहना है कि मौजूदा सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए परिवार की इकाई की सीमा में बदलाव किया जाना चाहिए, ताकि कर्मचारियों को मिलने वाले विभिन्न लाभ अधिक व्यावहारिक आधार पर तय किए जा सकें।

अभी अंतिम फैसला नहीं

कर्मचारी संगठनों की ओर से रखी जा रही ये सभी मांगें और सुझाव फिलहाल विचार के स्तर पर हैं। आठवें वेतन आयोग ने इन पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। आयोग विभिन्न कर्मचारी संघों, पेंशनभोगी संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव प्राप्त करने के बाद अपनी सिफारिशें तैयार करेगा।

बताया जा रहा है कि आयोग मई-जून 2027 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप सकता है। हालांकि, आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माने जाने की बात कही जा रही है। अंतिम रूप से वेतन, भत्तों और अन्य लाभों में कितना बदलाव होगा, यह आयोग की सिफारिशों और सरकार के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

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