नई दिल्ली, 10 जून (वेब वार्ता)। अपना घर खरीदना लगभग हर व्यक्ति का सपना होता है। इस सपने को पूरा करने के लिए अधिकांश लोग गृह ऋण का सहारा लेते हैं। लेकिन 15 से 25 वर्षों तक चलने वाले इस ऋण की सबसे बड़ी चुनौती भारी-भरकम ब्याज होता है। कई बार स्थिति ऐसी होती है कि जितनी राशि का ऋण लिया जाता है, लगभग उतनी ही रकम ब्याज के रूप में बैंक को चुकानी पड़ती है। हालांकि, थोड़ी सी वित्तीय समझदारी अपनाकर इस बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
मान लीजिए आपने एक करोड़ रुपये का गृह ऋण लिया है। ऋण की अवधि 20 वर्ष है और ब्याज दर 8.25 प्रतिशत निर्धारित है। ऐसे में आपकी मासिक किस्त लगभग 85 हजार 207 रुपये बनेगी। यदि आप निर्धारित अवधि तक इसी किस्त का भुगतान करते हैं, तो 240 महीनों में बैंक को कुल लगभग दो करोड़ चार लाख 49 हजार 680 रुपये चुकाने होंगे।
इस राशि में एक करोड़ रुपये मूलधन होगा, जबकि करीब एक करोड़ चार लाख रुपये केवल ब्याज के रूप में जाएंगे। यानी घर की वास्तविक कीमत से कहीं अधिक राशि आपको बैंक को चुकानी पड़ेगी।
हर महीने सिर्फ दो हजार रुपये बढ़ाने से बदल जाएगा पूरा गणित
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार यदि आप अपनी मासिक किस्त में केवल दो हजार रुपये की अतिरिक्त राशि जोड़ दें, तो इसका असर चौंकाने वाला हो सकता है। यानी यदि आपकी किस्त 85 हजार 207 रुपये है, तो उसे बढ़ाकर 87 हजार 207 रुपये कर दें।
यह बदलाव भले ही मामूली लगे, लेकिन इससे आपका गृह ऋण 20 वर्ष तक नहीं चलेगा। अनुमान के अनुसार यह ऋण लगभग 227 महीनों में ही समाप्त हो जाएगा। यानी आपका ऋण करीब 13 महीने पहले खत्म हो सकता है।
आखिर कैसे होती है इतनी बड़ी बचत?
गृह ऋण के शुरुआती वर्षों में मासिक किस्त का बड़ा हिस्सा ब्याज भुगतान में चला जाता है, जबकि मूलधन बहुत धीरे-धीरे कम होता है।
उदाहरण के तौर पर, एक करोड़ रुपये के ऋण पर पहले महीने का ब्याज लगभग 68 हजार 750 रुपये बनता है। सामान्य स्थिति में आपकी किस्त का केवल 16 हजार 457 रुपये हिस्सा मूलधन कम करता है।
लेकिन जब आप दो हजार रुपये अतिरिक्त जमा करते हैं, तो यह पूरी राशि सीधे बकाया मूलधन को कम करने में लगती है। मूलधन तेजी से घटने लगता है और अगले महीनों में कम शेष राशि पर ब्याज की गणना होती है। यही प्रक्रिया समय के साथ ब्याज में बड़ी बचत का कारण बनती है।
समय के साथ बढ़ता जाता है फायदा
विशेषज्ञों के मुताबिक, अतिरिक्त दो हजार रुपये जमा करने का असर धीरे-धीरे काफी बड़ा हो जाता है।
- एक वर्ष बाद सामान्य किस्त की तुलना में आपका बकाया ऋण लगभग 25 हजार रुपये कम होगा।
- पांच वर्षों में यह अंतर बढ़कर करीब डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच सकता है।
- दस वर्ष बाद सामान्य भुगतान करने वालों की तुलना में आपका बकाया ऋण लगभग तीन लाख 70 हजार रुपये कम रह जाएगा।
- पंद्रह वर्ष पूरे होने तक यह अंतर करीब सात लाख रुपये तक पहुंच सकता है।
यही कारण है कि ऋण की अंतिम अवधि में पहुंचने से पहले ही आपका पूरा गृह ऋण समाप्त हो सकता है।
अतिरिक्त भुगतान करते समय रखें इन बातों का ध्यान
वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि अतिरिक्त राशि जमा करने से पहले बैंक से यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वह रकम सीधे मूलधन में समायोजित की जाएगी। साथ ही अपनी आय और मासिक खर्चों का संतुलन बनाकर ही अतिरिक्त किस्त का निर्णय लेना चाहिए, ताकि भविष्य में भुगतान का दबाव न बढ़े।
छोटी आदत, बड़ा फायदा
गृह ऋण जीवन का सबसे बड़ा वित्तीय दायित्व माना जाता है। ऐसे में हर महीने थोड़ी सी अतिरिक्त राशि का भुगतान न केवल लाखों रुपये का ब्याज बचा सकता है, बल्कि आपको समय से पहले ऋणमुक्त भी बना सकता है। वित्तीय अनुशासन और सही योजना के जरिए अपने सपनों के घर की वास्तविक कीमत को काफी हद तक कम किया जा सकता है।




