नई दिल्ली, 10 अगस्त (वेब वार्ता)। क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर जमा नहीं करना कई बार महंगा पड़ सकता है। व्यस्तता, खाते में पर्याप्त राशि न होना या स्वचालित भुगतान विफल होने जैसी वजहों से भुगतान में देरी हो सकती है। हालांकि, केवल एक बार भुगतान देर से होने का मतलब यह नहीं है कि आपका पूरा क्रेडिट इतिहास खराब हो जाएगा। असर इस बात पर निर्भर करता है कि भुगतान कितने समय तक लंबित रहा, कार्ड जारी करने वाले बैंक की शर्तें क्या हैं और देरी की जानकारी क्रेडिट सूचना कंपनियों को किस स्थिति में भेजी गई।
इसलिए क्रेडिट कार्ड धारकों के लिए यह समझना जरूरी है कि भुगतान में देरी होने पर केवल विलंब शुल्क ही नहीं, बल्कि ब्याज, अन्य शुल्क और भविष्य में ऋण लेने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।
एक बार देर से भुगतान करने पर कितना असर?
बैंक और वित्तीय संस्थान किसी ग्राहक का ऋण या क्रेडिट कार्ड संबंधी व्यवहार देखते समय उसकी भुगतान आदतों पर भी ध्यान देते हैं। यदि बकाया राशि लंबे समय तक जमा नहीं की जाती और भुगतान संबंधी जानकारी क्रेडिट सूचना कंपनियों को रिपोर्ट होती है, तो इसका प्रभाव क्रेडिट इतिहास पर पड़ सकता है।
हालांकि, एक बार की देरी का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति की वित्तीय स्थिति हमेशा के लिए खराब हो गई। यदि इसके बाद सभी भुगतान समय पर किए जाते हैं, तो भविष्य में भुगतान व्यवहार बेहतर दिखाई दे सकता है।
इसलिए भुगतान में छोटी-सी चूक होने पर घबराने के बजाय तुरंत बकाया राशि की स्थिति जांचना और आवश्यक भुगतान करना अधिक महत्वपूर्ण है।
विलंब शुल्क के साथ ब्याज का बोझ
क्रेडिट कार्ड का भुगतान निर्धारित समय के बाद करने पर बैंक की शर्तों के अनुसार विलंब शुल्क लगाया जा सकता है। इसके अलावा, बकाया राशि पर ब्याज और अन्य वित्तीय शुल्क भी लागू हो सकते हैं।
यदि ग्राहक ने केवल बिल की कुछ राशि जमा की है और बाकी रकम बकाया है, तो शेष राशि पर भी कार्ड की शर्तों के अनुसार ब्याज लग सकता है। इससे मूल खरीदारी की लागत अपेक्षा से काफी अधिक हो सकती है।
यही कारण है कि क्रेडिट कार्ड को आसान उधार की सुविधा मानकर भुगतान को टालना आगे चलकर महंगा पड़ सकता है।
केवल न्यूनतम राशि जमा करना पर्याप्त नहीं
कई क्रेडिट कार्ड धारक बिल आने के बाद केवल न्यूनतम देय राशि जमा कर देते हैं। इससे तत्काल भुगतान की समस्या कुछ हद तक टल जाती है, लेकिन पूरा बकाया समाप्त नहीं होता।
बची हुई राशि पर कार्ड की लागू शर्तों के अनुसार ब्याज लग सकता है। इसलिए यदि आर्थिक स्थिति अनुमति देती है तो हर महीने पूरे विवरण की देय राशि का भुगतान करना अधिक बेहतर है।
न्यूनतम भुगतान को नियमित आदत बनाने के बजाय इसे केवल ऐसी स्थिति में इस्तेमाल करना चाहिए, जब पूरी राशि तत्काल चुकाना संभव न हो।
स्वचालित भुगतान विफल हो जाए तो क्या करें?
कई लोग समय पर भुगतान के लिए खाते से स्वचालित कटौती की सुविधा लेते हैं। लेकिन खाते में पर्याप्त राशि न होने, भुगतान अनुमति में समस्या या किसी तकनीकी कारण से यह व्यवस्था विफल हो सकती है।
ऐसी स्थिति में सबसे पहले बैंक या कार्ड जारी करने वाली संस्था से संपर्क कर यह पता करना चाहिए कि भुगतान क्यों नहीं हुआ। इसके बाद लंबित राशि का भुगतान जल्द से जल्द कर देना चाहिए।
भुगतान की स्थिति की पुष्टि करना भी जरूरी है, ताकि बाद में यह विवाद न रहे कि रकम जमा हुई थी या नहीं।
एक बार की गलती और लगातार देरी अलग
भुगतान में एक बार हुई चूक और लगातार देर से भुगतान करना समान स्थिति नहीं है। लगातार भुगतान में देरी होने से वित्तीय संस्थानों के सामने ग्राहक के भुगतान व्यवहार को लेकर अधिक गंभीर संकेत जा सकते हैं।
इसलिए यदि किसी महीने भुगतान में चूक हो भी जाए तो आगे के सभी भुगतान समय पर करना महत्वपूर्ण है। समय पर भुगतान का लगातार रिकॉर्ड बनाए रखना वित्तीय अनुशासन के लिए सबसे उपयोगी कदमों में से एक है।
क्रेडिट कार्ड धारक कैसे बचें?
क्रेडिट कार्ड के भुगतान में देरी से बचने के लिए कुछ सरल सावधानियां अपनाई जा सकती हैं। बिल की अंतिम तारीख के लिए मोबाइल में पहले से सूचना लगा सकते हैं। स्वचालित भुगतान की सुविधा लेते समय खाते में पर्याप्त राशि बनाए रखना भी जरूरी है।
इसके अलावा, भुगतान की अंतिम तारीख और वेतन मिलने की तारीख के बीच उचित अंतर रखना उपयोगी हो सकता है। यदि बैंक खाते से स्वचालित भुगतान किया जाता है तो समय-समय पर उसकी स्थिति भी जांचते रहना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि क्रेडिट कार्ड की सुविधा को अतिरिक्त आय न मानकर उधार की सुविधा के रूप में इस्तेमाल किया जाए। समय पर भुगतान करने की आदत न केवल अनावश्यक शुल्क और ब्याज से बचाती है, बल्कि लंबे समय में बेहतर वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में भी मदद करती है।




