नई दिल्ली, 02 जून (वेब वार्ता)। देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था सुप्रीम कोर्ट को मंगलवार को पांच नए न्यायाधीश मिल गए। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक औपचारिक समारोह में पांचों न्यायाधीशों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। नई नियुक्तियों के साथ शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 38 हो गई है, जो इसकी स्वीकृत क्षमता के बराबर है।
शपथ ग्रहण करने वाले न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, न्यायमूर्ति अरुण पल्ली और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना शामिल हैं। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों के बाद इन नियुक्तियों को अधिसूचित किया था।
चार उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश हुए पदोन्नत
नए नियुक्त न्यायाधीशों में चार विभिन्न उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश रहे हैं। न्यायमूर्ति शील नागू पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे। न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे, जबकि न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का नेतृत्व कर रहे थे।
इसी प्रकार न्यायमूर्ति अरुण पल्ली जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। इन सभी को उनकी न्यायिक विशेषज्ञता और अनुभव के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्त किया गया है।
वी. मोहना की नियुक्ति बनी विशेष चर्चा का विषय
वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना की नियुक्ति विशेष महत्व रखती है। वह उन चुनिंदा विधि विशेषज्ञों में शामिल हो गई हैं जिन्हें सीधे अधिवक्ता के रूप में कार्य करने के बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ में नियुक्त किया गया है।
उनकी नियुक्ति से सर्वोच्च न्यायालय में महिला प्रतिनिधित्व भी मजबूत हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में शीर्ष अदालत में महिला न्यायाधीशों की संख्या सीमित रही है और इस नियुक्ति को उस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
न्यायिक कार्यों को मिलेगी गति
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट में बड़ी संख्या में मामलों की सुनवाई लंबित रहती है और न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से विभिन्न पीठों के गठन में सुविधा होगी।
नई नियुक्तियों से पहले सर्वोच्च न्यायालय में 32 न्यायाधीश कार्यरत थे। अब संख्या बढ़कर 38 हो गई है, जिससे न्यायिक कार्यों के संचालन में और अधिक संतुलन आने की संभावना है।
जल्द फिर खाली हो सकती हैं दो सीटें
हालांकि शीर्ष अदालत फिलहाल अपनी स्वीकृत क्षमता तक पहुंच गई है, लेकिन इस माह के अंत में दो वरिष्ठ न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त होने की संभावना है। ऐसे में निकट भविष्य में फिर से कुछ रिक्तियां उत्पन्न हो सकती हैं।
न्यायपालिका से जुड़े जानकारों का कहना है कि समय पर नियुक्तियां होने से न्यायिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और आम नागरिकों को त्वरित न्याय उपलब्ध कराने के प्रयासों को बल मिलेगा।




