प्रयागराज, 15 मई (वेब वार्ता)। वाराणसी में नाव पर रोजा इफ्तार के दौरान बिरयानी के अवशेष गंगा नदी में फेंकने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आठ आरोपियों को जमानत दे दी है। अदालत ने आरोपियों द्वारा शपथ पत्र के माध्यम से माफी मांगने को राहत का आधार माना है। हालांकि इस मामले में छह अन्य आरोपियों को अभी जमानत नहीं मिल सकी है।
यह आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो अलग-अलग एकल पीठों द्वारा पारित किया गया। जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की एकल पीठ ने पांच आरोपियों की जमानत याचिका मंजूर की, जबकि जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने तीन अन्य आरोपियों को राहत प्रदान की।
जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की पीठ ने मोहम्मद आजाद अली, मोहम्मद तहसीम, निहाल अफरीदी, मोहम्मद तौसीफ और मोहम्मद अनस की जमानत अर्जी स्वीकार की। वहीं जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की पीठ ने मोहम्मद समीर, मोहम्मद अहमद रजा और मोहम्मद फैजान को जमानत देने का आदेश जारी किया।
अदालत में दाखिल शपथ पत्र में आरोपियों ने अपने कृत्य पर खेद व्यक्त करते हुए माफी मांगी थी। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें सशर्त राहत प्रदान की। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए कानूनी प्रक्रिया जारी रखने की बात भी कही है।
यह मामला उस समय चर्चा में आया था जब वाराणसी में नाव पर आयोजित रोजा इफ्तार कार्यक्रम के दौरान बिरयानी के अवशेष गंगा नदी में फेंके जाने का वीडियो और तस्वीरें सामने आई थीं। घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुल 14 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
फिलहाल इस मामले में आठ आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, जबकि छह अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अभी निर्णय नहीं हुआ है। मामले की आगे की सुनवाई नियमानुसार जारी रहेगी।




