राजाजी टाइगर रिजर्व में भूमि आवंटन घोटाले की शिकायत, हिमाचल के वन गुर्जर को मिली जमीन

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हरिद्वार, 15 मई (वेब वार्ता)। राजाजी टाइगर रिजर्व में वन गुर्जरों के पुनर्वास के लिए किए गए भूमि आवंटन में बड़ी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि हिमाचल प्रदेश के एक वन गुर्जर को भी राजाजी टाइगर रिजर्व की गैंडीखाता रेंज में 8200 वर्ग मीटर भूमि आवंटित कर दी गई। मामले के सामने आने के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया है।

राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोसे ने बताया कि इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई है। शिकायत के आधार पर जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

जानकारी के अनुसार राजाजी टाइगर रिजर्व और कालागढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र के वन गुर्जरों को हरिद्वार जिले के गैंडीखाता और पथरी क्षेत्र में विस्थापित किया गया था। पुनर्वास योजना के तहत प्रत्येक परिवार को 8200 वर्ग मीटर भूमि आवंटित की गई थी। इसमें 8000 वर्ग मीटर भूमि पशुओं के चारे के लिए और 200 वर्ग मीटर भूमि आवास निर्माण के लिए निर्धारित की गई थी।

हालांकि अब आरोप लग रहे हैं कि भूमि आवंटन प्रक्रिया में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां की गईं। वन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार एक वन गुर्जर द्वारा अलग-अलग दो पहचान पत्र बनाकर जमीन हासिल करने का मामला सामने आया है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के एक वन गुर्जर को भी गैंडीखाता क्षेत्र में भूमि आवंटित किए जाने की शिकायत मिली है।

जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में विस्थापन के नाम पर मिली भूमि को अन्य लोगों को बेच दिया गया, जबकि नियमों के अनुसार वन विभाग की आवंटित जमीन का क्रय-विक्रय नहीं किया जा सकता। कुछ वन गुर्जरों द्वारा अपनी जमीन किराये पर देकर स्वयं गंगा किनारे और हरिद्वार के जंगल क्षेत्रों में रहने की बात भी सामने आई है।

सूत्रों के मुताबिक इससे पहले भारतीय वन सेवा की अधिकारी मीनाक्षी जोशी की जांच में भी करीब 350 वन गुर्जरों को गलत तरीके से वन भूमि आवंटित किए जाने का मामला उजागर हुआ था। हालांकि उस मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

अब एक बार फिर नए खुलासों के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली और भूमि आवंटन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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