मुंबई, 15 मई (वेब वार्ता)। हिंदी सिनेमा की कई चर्चित और भावनात्मक फिल्मों की कहानी लिखने वाली लेखिका शगुफ्ता रफीक की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। ‘वो लम्हे’, ‘आवारापन’, ‘धोखा’, ‘राज 2’, ‘मर्डर 2’, ‘जन्नत 2’ और ‘आशिकी 2’ जैसी फिल्मों के जरिए दर्शकों के दिलों को छूने वाली शगुफ्ता ने अपने जीवन में गरीबी, संघर्ष, अपमान और दर्द के कई कठिन दौर देखे हैं।
शगुफ्ता रफीक को अभिनेत्री अनवरी बेगम ने गोद लिया था। बचपन से ही उन्हें अपने अस्तित्व और परिवार को लेकर ताने सुनने पड़े। उनके वास्तविक माता-पिता कौन थे, इसकी जानकारी कभी सामने नहीं आई। आर्थिक तंगी इतनी गंभीर थी कि परिवार को भीख मांगकर गुजारा करना पड़ता था। शगुफ्ता ने कई बार बताया कि उनका बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता।
कम पढ़ाई और लगातार संघर्ष के बीच उन्होंने कम उम्र में ही घर की जिम्मेदारी संभालने का फैसला किया। शगुफ्ता के अनुसार उन्होंने केवल सातवीं कक्षा तक पढ़ाई की और दसवीं की परीक्षा में कई बार असफल रहीं। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था कि बचपन में वह डांट से बचने के लिए कहानियां गढ़ती थीं और शायद वहीं से उनके भीतर कहानी कहने की क्षमता विकसित हुई।
गरीबी और मजबूरी के कारण शगुफ्ता को किशोरावस्था में जिस्मफरोशी के दलदल में उतरना पड़ा। उन्होंने स्वीकार किया था कि परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि घर चलाने के लिए उन्हें यह रास्ता अपनाना पड़ा। बाद में एक मित्र की सलाह पर उन्होंने बार डांसिंग शुरू की और दुबई सहित कई स्थानों पर मंच प्रस्तुतियां दीं।
शगुफ्ता ने बताया था कि उनकी जिंदगी का बड़ा हिस्सा फिल्म ‘आशिकी 2’ की कहानी में दिखाई देता है। उन्होंने कहा था कि फिल्म की नायिका के किरदार में उनकी निजी जिंदगी की झलक मौजूद है। दुबई में उनकी मुलाकात एक पाकिस्तानी मूल के व्यक्ति से हुई, जिसने उनके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी अनुभव से प्रेरित होकर फिल्म के कुछ पात्रों और भावनात्मक पहलुओं को गढ़ा गया।
साल 2002 में उनकी मुलाकात फिल्म निर्माता महेश भट्ट से हुई, जिन्होंने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें फिल्म लेखन का अवसर दिया। इसके बाद निर्देशक मोहित सूरी की फिल्मों से उन्हें पहचान मिली। शगुफ्ता ने बताया था कि जब उन्होंने अपनी पहली फिल्म ‘वो लम्हे’ साइन की, तब तक वह बार में डांस कर रही थीं।
उन्होंने महेश भट्ट के साथ अपने संबंधों को लेकर भी खुलकर बात की थी। शगुफ्ता के अनुसार दोनों के जीवन संघर्षों में कई समानताएं थीं और इसी वजह से उनके बीच गहरी समझ विकसित हुई।
आज शगुफ्ता रफीक हिंदी फिल्म उद्योग की चर्चित पटकथा लेखिकाओं में गिनी जाती हैं। उनकी लिखी फिल्मों के गीत और कहानियां दर्शकों के दिलों में खास जगह बना चुकी हैं। संघर्ष और कठिन परिस्थितियों से निकलकर उन्होंने जिस तरह अपनी पहचान बनाई, वह कई लोगों के लिए प्रेरणा का उदाहरण बन गई है।




