लखनऊ, 23 मई (वेब वार्ता)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रमिक कल्याण, कौशल विकास और रोजगार सृजन को अधिक व्यापक और परिणाममुखी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। उन्होंने बाल श्रमिक विद्या योजना को प्रदेश के सभी 75 जनपदों तक विस्तारित करने, ‘सेवामित्र व्यवस्था’ को और प्रभावी बनाने तथा निर्माण श्रमिकों के लिए आधुनिक सुविधा केंद्र विकसित करने पर जोर दिया है।
शनिवार को श्रम एवं सेवायोजन विभाग की योजनाओं और प्रस्तावित कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक केवल उत्पादन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और विकास की सबसे बड़ी शक्ति हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता श्रमिकों, युवाओं और कमजोर वर्गों को सम्मानजनक जीवन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित कार्य वातावरण और बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि कोई भी बच्चा आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने बाल श्रम प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर बच्चों को विद्यालयों से जोड़ने और उनके पुनर्वास को प्रभावी बनाने पर बल दिया। साथ ही निजी क्षेत्र के सहयोग से इन बच्चों के कौशल विकास की कार्ययोजना तैयार करने के भी निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2020 में शुरू की गई बाल श्रमिक विद्या योजना के अंतर्गत 8 से 18 वर्ष आयु वर्ग के कामकाजी बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। वर्तमान में यह योजना 20 जनपदों में संचालित है। मुख्यमंत्री ने इसे नए प्रावधानों के साथ प्रदेश के सभी 75 जनपदों में लागू करने के निर्देश दिए।
योगी आदित्यनाथ ने ‘सेवामित्र व्यवस्था’ को रोजगार और जनसुविधा का अभिनव मॉडल बताते हुए इसे और अधिक जनोपयोगी बनाने की आवश्यकता जताई। वर्ष 2021 से संचालित इस व्यवस्था के माध्यम से नागरिक मोबाइल अनुप्रयोग, वेब पोर्टल अथवा कॉल केंद्र के जरिए घरेलू सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में इस पोर्टल पर 1097 सेवा प्रदाता, 5049 सेवामित्र और 54,747 कुशल कामगार पंजीकृत हैं।
मुख्यमंत्री ने सरकारी विभागों में भी आवश्यकता के अनुसार सेवामित्र व्यवस्था के उपयोग को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उन्होंने श्रम विभाग में हुए संस्थागत सुधारों की सराहना करते हुए उद्योगों और श्रमिक हितों के बीच संतुलन को सरकार की नीति का महत्वपूर्ण आधार बताया।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि प्रदेश में अब तक 32,583 कारखाने पंजीकृत हो चुके हैं। मार्च 2017 तक जहां यह संख्या 14,176 थी, वहीं अप्रैल 2017 के बाद 18,407 नए कारखानों का पंजीकरण हुआ है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 4860 कारखानों का पंजीकरण किया गया और विभाग को विभिन्न सुधारों के लिए सम्मान भी प्राप्त हुआ है।
मुख्यमंत्री ने निर्माण श्रमिकों के लिए औद्योगिक शहरों में प्रस्तावित श्रमिक सुविधा केंद्रों को व्यवस्थित रूप से विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन्हें केवल श्रमिकों के एकत्रीकरण स्थल के बजाय सहायता और सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। साथ ही दूसरे क्षेत्रों से आने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित आवास सुविधा उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी बताई।
योगी आदित्यनाथ ने कानपुर में प्रस्तावित औद्योगिक श्रमिक प्रशिक्षण संस्थान और छात्रावास योजना को कौशल विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना समय की मांग है। उन्होंने रोजगार मिशन को वैश्विक अवसरों से जोड़ने और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने पर भी जोर दिया।




