लखनऊ, 05 अक्टूबर (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों तक डिजिटल शिक्षा और अध्ययन संसाधनों की पहुंच को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार की पहल और इसके विस्तार की जानकारी साझा की है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि प्रदेश में डिजिटल लाइब्रेरी की पहुंच अब 57,600 ग्राम पंचायतों तक हो गई है। उनके अनुसार, वर्ष 2017 से पहले यह सुविधा लगभग 76 स्थानों तक सीमित थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए पहले किताबों और अन्य संसाधनों के लिए शहरों पर निर्भरता रहती थी। इससे छात्रों का समय और पैसा दोनों खर्च होता था। अब ग्राम पंचायत सचिवालयों में स्थापित डिजिटल लाइब्रेरी के जरिए स्थानीय स्तर पर पढ़ाई के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
किताबों के साथ डिजिटल संसाधनों की सुविधा
मुख्यमंत्री द्वारा साझा किए गए उदाहरण में बहराइच के तेजवापुर ब्लॉक के खसहा मोहम्मदपुर स्थित ग्राम पंचायत सचिवालय की डिजिटल लाइब्रेरी का उल्लेख किया गया। यहां कंप्यूटर, प्रिंटर, हाई-स्पीड इंटरनेट, वाई-फाई, स्मार्ट टीवी और सीसीटीवी जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने की बात कही गई है।
इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकों के साथ नेशनल बुक ट्रस्ट का साहित्य भी उपलब्ध कराया गया है। इसका उद्देश्य पारंपरिक पुस्तक अध्ययन के साथ ई-लर्निंग और डिजिटल कंटेंट को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है।
युवाओं को स्मार्टफोन और टैबलेट देने का भी दावा
मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रदेश में डिजिटल शिक्षा को स्कूलों तक सीमित न रखते हुए करीब 60 लाख युवाओं को स्मार्टफोन और टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम और 15 हजार से ज्यादा विद्यालयों में आईसीटी लैब के जरिए शिक्षा में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
सीएम योगी ने कहा कि स्थानीय स्तर पर शैक्षिक संसाधन उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए शहरों का रुख करने की जरूरत कम होगी। उनके अनुसार, इससे शहर आने-जाने में खर्च होने वाला समय और पैसा पढ़ाई तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगाया जा सकता है।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर पुराने आंकड़ों का भी जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में वर्ष 2012 से 2016 के बीच की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उस अवधि में 6.22 लाख बच्चों को पाठ्यपुस्तकें और 97 लाख बच्चों को यूनिफॉर्म उपलब्ध नहीं हो सकी थी। इसके जरिए उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में संसाधनों की उपलब्धता और उनकी पहुंच के बीच के अंतर की ओर ध्यान दिलाया।
सरकार की ग्राम पंचायत डिजिटल लाइब्रेरी पहल के तहत पंचायत सचिवालयों को केवल प्रशासनिक सेवाओं तक सीमित न रखकर अध्ययन, तकनीक और डिजिटल ज्ञान के केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल संसाधनों की पहुंच बढ़ने से बच्चों और युवाओं के लिए पढ़ाई के नए विकल्प तैयार हो रहे हैं।




