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हरदोई में जिला सहकारी बैंक में 2.98 करोड़ का केसीसी घोटाला, पांच शाखा प्रबंधक समेत छह निलंबित

लक्ष्मीकान्त पाठक

हरदोई (वेबवार्ता)। जिला सहकारी बैंक में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण वितरण के नाम पर हुई वित्तीय अनियमितताओं ने बैंकिंग व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में करीब 2.98 करोड़ रुपये का कर्ज डूबने और केसीसी खातों में एनपीए (गैर निष्पादित परिसंपत्ति) का स्तर पांच प्रतिशत से बढ़कर 19 प्रतिशत तक पहुंचने का मामला सामने आया है। इस बड़े वित्तीय घपले में बैंक के पांच शाखा प्रबंधकों और एक कैशियर समेत छह कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्राथमिक जांच में कुल 13 बैंककर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद सेवानिवृत्त अधिकारियों और यूपी को-ऑपरेटिव यूनियन (पीसीयू) के कर्मचारियों पर भी कार्रवाई का शिकंजा कसने लगा है।
जिला सहकारी बैंक में केसीसी ऋण वितरण के दौरान नियमों की अनदेखी और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों के बाद सहकारिता विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया। संयुक्त आयुक्त एवं संयुक्त निबंधक, लखनऊ मंडल के निर्देश पर कराई गई जांच में ऋण वितरण और खातों के संचालन से जुड़ी कई गड़बड़ियां सामने आईं। जांच में पता चला कि केसीसी खातों में एनपीए का स्तर पांच प्रतिशत से बढ़कर 19 प्रतिशत हो गया। इसके चलते लगभग 2.98 करोड़ रुपये का ऋण फंस गया। बैंक के लिए यह स्थिति गंभीर वित्तीय चिंता का विषय बन गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई।
पांच शाखा प्रबंधकों और कैशियर पर गिरी गाज
बैंक के सचिव एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अश्वनी कुमार कटिहार ने बताया कि केसीसी ऋण वितरण में नियमों की अनदेखी और गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप में छह वर्तमान कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। इनमें पाली शाखा के प्रबंधक बहराम, पिहानी शाखा के प्रबंधक रामपाल, सांडी शाखा के प्रबंधक भानु प्रताप सिंह, टड़ियावां शाखा की प्रबंधक श्रद्धा सिंह और मल्लावां शाखा के प्रबंधक शैलेश कुमार वर्मा शामिल हैं। इनके अलावा पाली शाखा के कैशियर दीपक को भी निलंबित किया गया है।
सेवानिवृत्ति के बाद भी नहीं बच सके पूर्व अधिकारी
इस मामले में जांच का दायरा केवल वर्तमान कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहा। बैंक की विभिन्न शाखाओं में पूर्व में तैनात रहे सेवानिवृत्त अधिकारियों की भूमिका भी जांच में सामने आई है। सांडी और पिहानी शाखा में पूर्व वरिष्ठ शाखा प्रबंधक रहे राकेश त्रिपाठी तथा पिहानी शाखा में तैनात रहे सेवानिवृत्त वरिष्ठ शाखा प्रबंधक मूलचंद्र के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी है। दोनों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को पत्र भेजा गया है।
पीसीयू के पांच कर्मचारियों की भूमिका भी उजागर
केसीसी ऋण वितरण में हुई अनियमितताओं की जांच में यूपी को-ऑपरेटिव यूनियन लिमिटेड (पीसीयू) के तहत प्रतिनियुक्ति पर बैंक में तैनात पांच कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई है। ये कर्मचारी सुपरवाइजर के पद पर तैनात होने के साथ कैशियर का काम भी संभाल रहे थे। इनमें प्रदीप यादव, दिलीप तिवारी, सुशील कुमार, सुमन और आईएस पवन शामिल हैं। इनमें आईएस पवन का निधन हो चुका है, जबकि शेष चार कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए पीसीयू संस्था को पत्र भेजा गया है।
26 अक्टूबर की बैठक में लिया गया कार्रवाई का निर्णय
बैंक के सीईओ अश्वनी कुमार कटिहार के मुताबिक, संयुक्त आयुक्त एवं संयुक्त निबंधक, लखनऊ मंडल की ओर से 16 अक्टूबर को मिले पत्र के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इसके क्रम में 26 अक्टूबर को बैंक अध्यक्ष अशोक सिंह की अध्यक्षता में प्रबंध समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जांच रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की गई और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्णय लिया गया। इसके बाद छह वर्तमान कर्मचारियों को निलंबित किया गया तथा सेवानिवृत्त अधिकारियों और पीसीयू कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को पत्र भेजे गए।
विस्तृत जांच जारी, कई और खुलासों की संभावना
प्राथमिक जांच में 13 बैंककर्मियों की भूमिका सामने आने के बाद अब विस्तृत विभागीय जांच जारी है। इस पूरे प्रकरण ने जिला सहकारी बैंक में केसीसी ऋण वितरण की निगरानी, वित्तीय अनुशासन और वसूली व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसानों को ऋण देने के लिए बनाई गई व्यवस्था में आखिर ऐसी कौन सी चूक हुई, जिसके चलते करोड़ों रुपये का कर्ज एनपीए में पहुंच गया और बैंक का एनपीए पांच प्रतिशत से बढ़कर 19 प्रतिशत हो गया। अब विस्तृत जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि अनियमितताओं के लिए किस स्तर पर कौन जिम्मेदार रहा और बैंक की फंसी हुई धनराशि की वसूली के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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