मथुरा, 04 जून (वेब वार्ता)। आईआईटियन बाबा के नाम से चर्चित अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास से जुड़े मामले में पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। आरोपों की सच्चाई तक पहुंचने के लिए अब वैज्ञानिक जांच का सहारा लिया जा रहा है। पुलिस उन युवक-युवतियों के रक्त नमूनों की जांच कराने की तैयारी कर रही है, जो लंबे समय तक बाबा के संपर्क में रहे थे या उसके आश्रम में निवास करते थे।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि आश्रम में रहने वाले लोगों के व्यवहार में आए कथित बदलाव के पीछे किसी प्रकार के नशीले पदार्थ का प्रभाव था या नहीं। इसके लिए विभिन्न राज्यों में रहने वाले पीड़ितों और पीड़िताओं को मथुरा बुलाकर उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं तथा आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण कराए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि आश्रम में रहने वाले लोगों को भोजन या पेय पदार्थों के माध्यम से किसी नशीले तत्व का सेवन कराया जाता था अथवा नहीं। हालांकि इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट और वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद ही सामने आएगा।
वैज्ञानिक जांच पर पुलिस का जोर
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने बताया कि मामले में उपलब्ध आरोपों और शिकायतों की गहन जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि रक्त नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों का विश्लेषण किया जाएगा और उसी आधार पर आगे के साक्ष्य जुटाए जाएंगे।
पुलिस का मानना है कि वैज्ञानिक जांच से मामले के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्पष्टता आ सकती है, जिससे आगे की कानूनी कार्रवाई को मजबूती मिलेगी।
आर्थिक गतिविधियों और संपर्कों की भी पड़ताल
मामले में नए खुलासों के बाद जांच एजेंसियों की नजर अब आरोपी के आर्थिक लेन-देन और संपर्कों पर भी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उसके पास आने वाले लोगों और वित्तीय गतिविधियों का स्वरूप क्या था तथा क्या इस नेटवर्क के अन्य पहलू भी सामने आ सकते हैं।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने भी मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग की है। क्षेत्र के कुछ निवासियों का दावा है कि आरोपी के ठिकाने पर लगातार बाहरी लोगों का आना-जाना लगा रहता था, जिससे आसपास के लोगों में पहले से ही संदेह बना हुआ था।
बाहरी व्यक्तियों के सत्यापन की मांग
राधाकुंड क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने धार्मिक स्थलों और परिक्रमा मार्गों पर रहने वाले बाहरी व्यक्तियों के सत्यापन की मांग उठाई है। उनका कहना है कि सुरक्षा की दृष्टि से समय-समय पर पहचान और दस्तावेजों की जांच आवश्यक है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके।
हालांकि पुलिस ने इस संबंध में अभी किसी विशेष समूह या व्यक्ति के खिलाफ कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जांच एजेंसियां उपलब्ध तथ्यों और सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई कर रही हैं।
गिरफ्तारी के बाद घर में बंद मिला पालतू कुत्ता
मामले में गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी के मकान को सील कर दिया था। इस दौरान उसका पालतू कुत्ता घर के भीतर ही रह गया। पड़ोसियों के अनुसार कुत्ता लंबे समय तक घर के अंदर बंद रहा और लगातार आवाजें निकालता रहा। शिकायत मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए उसे बाहर निकाला।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक रिपोर्ट, पीड़ितों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जांच पूरी होने तक किसी भी आरोप को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।




