कानपुर, 03 जून (हरी शंकर शर्मा)। लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों के समय पर निदान और सटीक उपचार की दिशा में गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरीय़ल (ळैटड) मेडिकल कॉलेज ने एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. संजय काला के विशेष प्रयासों से रेडियोलॉजी विभाग को करीब 45 लाख रुपये की लागत वाली अत्याधुनिक जीई लॉजिक पी-9 अल्ट्रासाउंड मशीन मिल गई है, जिसे विभाग में सफलतापूर्वक इंस्टॉल कर दिया गया है।
रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक वर्मा ने इस मशीन की उपयोगिता साझा करते हुए बताया कि यह तकनीक कानपुर और आस-पास के मरीजों के लिए एक वरदान साबित होगी। अब तक हैलट अस्पताल में सामान्य आधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीनों से जांच हो रही थी, लेकिन इस नई मशीन के आने से मरीजों को बिना किसी चीर-फाड़ के विश्वस्तरीय डायग्नोस्टिक सेवाएँ मिल सकेंगी।
बिना बायोप्सी के लिवर की जांच
डॉ. अशोक वर्मा के अनुसार, इस मशीन की सबसे क्रांतिकारी विशेषता इसकी एलास्टोग्राफी (म्संेजवहतंचील) तकनीक है। आमतौर पर लिवर सिरोसिस या फाइब्रोसिस की स्थिति जांचने के लिए मरीजों को दर्दनाक लिवर बायोप्सी (सुई के जरिए लिवर का टुकड़ा निकालना) करानी पड़ती थी, जिसमें संक्रमण का खतरा भी रहता था। लेकिन इस मशीन की एलास्टोग्राफी तकनीक से बिना किसी शल्य प्रक्रिया (सर्जरी) के शरीर के ऊतकों की कठोरता को मापा जा सकता है। यह पूरी तरह दर्दरहित, सुरक्षित और संक्रमण-मुक्त जांच है। इसके माध्यम से चिकित्सक न केवल बीमारी की सटीक अवस्था का पता लगा सकेंगे, बल्कि इलाज के बाद मरीज में हो रहे सुधार की भी बेहतरीन निगरानी भ्ज्ञी कर सकेंगे।
मशीन की प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ
यह मशीन उत्कृष्ट इमेजिंग क्षमता और आधुनिक सॉफ्टवेयर से लैस है, जो डॉक्टरों को बीमारी के शुरुआती दौर में ही सटीक परिणाम देती है। उन्नत कलर डॉप्लर तकनीकरू रक्त वाहिकाओं में खून के बहाव का बारीकी से अध्ययन करना, उत्कृष्ट इमेजिंग क्षमता हाई-रेसोल्यूशन तस्वीरें जिससे छोटी से छोटी गांठ भी पकड़ में आ सके। अनुकूल इंटरफेस अत्याधुनिक प्रोब तकनीक के कारण त्वरित और बेहद सटीक डायग्नोसिस करने में सक्षम है। जीई लॉजिक पी-9 सिर्फ लिवर ही नहीं, बल्कि शरीर के कई अन्य अंगों की गंभीर जांचों में भी प्रभावी भूमिका निभाएगी।




