गोरखपुर, 27 मई (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में मंगलवार को राप्ती नदी में नहाने गए तीन किशोरों की डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। राजघाट थाना क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। एनडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों द्वारा कई घंटे तक चलाए गए सर्च अभियान के बाद देर शाम तीनों किशोरों के शव नदी से बरामद कर लिए गए।
मिली जानकारी के अनुसार तुर्कमानपुर निवासी सुनील का बेटा निक्कू, मोहन का बेटा सत्ती और फखरुद्दीन का बेटा इरफान मंगलवार को राजघाट स्थित राप्ती नदी में नहाने पहुंचे थे। तीनों किशोरों की उम्र करीब 15 वर्ष बताई गई है। नहाने के दौरान वे गहरे पानी में चले गए और देखते ही देखते डूब गए। घटना की जानकारी मिलते ही नदी किनारे अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
सूचना पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। पुलिस और प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू कराया। सदर उपजिलाधिकारी दीपक गुप्ता भी मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य की निगरानी की। उन्होंने एनडीआरएफ टीम को तेजी से सर्च अभियान चलाने के निर्देश दिए।
काफी देर तक चले बचाव अभियान के दौरान एनडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों ने सबसे पहले निक्कू और सत्ती के शव नदी से बाहर निकाले। तीसरे किशोर इरफान की तलाश देर शाम तक जारी रही, जिसके बाद उसका शव भी बरामद कर लिया गया। तीनों शव मिलने के बाद मौके पर मौजूद परिजनों और स्थानीय लोगों में शोक और पीड़ा का माहौल गहरा गया।
तीनों किशोरों की मौत की खबर जैसे ही परिवारों तक पहुंची, घरों में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और तुर्कमानपुर क्षेत्र में मातमी सन्नाटा छा गया। घटनास्थल पर मौजूद कई लोगों की आंखें भी नम हो गईं। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
इधर, नदी और तालाबों में डूबने की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए जिले में पुलिस द्वारा जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। विभिन्न थाना क्षेत्रों में पुलिस टीमें नदी घाटों और जलाशयों के आसपास लोगों को सतर्क कर रही हैं। अभिभावकों से अपील की जा रही है कि वे बच्चों को गहरे जलाशयों में नहाने के लिए न भेजें, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं से बचा जा सके।
अभियान के तहत संवेदनशील घाटों पर चेतावनी संबंधी बैनर और पोस्टर लगाए जा रहे हैं तथा कई स्थानों पर सुरक्षा के मद्देनजर बैरिकेडिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों और स्थानीय लोगों के साथ समन्वय किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि लोगों की जागरूकता और सतर्कता ही ऐसे हादसों को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।




