राज्यउत्तर प्रदेशचालान का खौफ या ‘मंथली एंट्री’ का खेल?

चालान का खौफ या ‘मंथली एंट्री’ का खेल?

पिकअप का पीछा करने के आरोप से मचा हड़कंप, हादसे के बाद NH-44 पर उतरे चालक; जाम ने खोली कथित वसूली की ‘कहानी’#
ललितपुर (आलोक चतुर्वेदी) यात्री कर विभाग की कथित मनमानी और वाहन चालकों के उत्पीड़न को लेकर सोमवार को उस समय बड़ा बवाल खड़ा हो गया, जब पिकअप चालकों ने यात्री कर अधिकारी लिली चौधरी पर चालान का भय दिखाकर कथित रूप से ‘मंथली एंट्री’ वसूलने और वाहन चालकों को परेशान करने के गंभीर आरोप लगाए। मामला इतना गरमाया कि आक्रोशित वाहन चालकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर जाम लगा दिया। दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और हाईवे की रफ्तार थम गई।
बताया गया कि सोमवार सुबह एक पिकअप किसान का अनाज लेकर मंडी की ओर जा रही थी। वाहन चालकों का आरोप है कि इसी दौरान यात्री कर अधिकारी लिली चौधरी ने पिकअप का पीछा किया। चालकों के मुताबिक, इसी दौरान पिकअप एक ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई। गनीमत रही कि बड़ा हादसा होने से टल गया।
घटना के बाद वाहन चालकों का गुस्सा भड़क उठा। बड़ी संख्या में पिकअप चालक और अन्य वाहन चालक एकत्र हुए और उन्होंने NH-44 पर जाम लगा दिया। दोनों ओर वाहनों की कतारें लगने से यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया।
‘मंथली नहीं तो चालान!’—चालकों ने लगाए गंभीर आरोप
आक्रोशित वाहन चालकों ने आरोप लगाया कि वाहनों को रोककर चालान का भय दिखाया जाता है और कथित तौर पर नियमित ‘मंथली एंट्री’ देने का दबाव बनाया जाता है। उनका कहना था कि नियमों का उल्लंघन होने पर नियमानुसार कार्रवाई हो, लेकिन कार्रवाई की आड़ में कथित वसूली का दबाव किसी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पुराने विवादों ने फिर खोले सवाल—दो घटनाएं, एक जैसी शिकायतों का आरोप
यात्री कर अधिकारी की कार्यशैली को लेकर वाहन मालिकों ने पूर्व की दो घटनाओं का भी हवाला दिया, जिनसे विभाग की कार्यप्रणाली पर पहले भी सवाल उठने की बात कही गई।
(1) पलवल के ट्रक मालिकों की शिकायत:
वाहन मालिकों के मुताबिक, पूर्व में पलवल के कुछ ट्रक मालिकों ने तत्कालीन जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी से शिकायत की थी। आरोप लगाया गया था कि उनके ट्रकों को कभी ओवरहाइट तो कभी अन्य नियमों का हवाला देकर रोककर कथित रूप से अवैध वसूली का दबाव बनाया जाता है। वाहन मालिकों का कहना था कि नियमों के नाम पर बार-बार परेशान किए जाने से वे काफी परेशान थे।
(2) विदिशा के मोटर मालिक का मामला:
वाहन मालिकों द्वारा बताए गए एक अन्य पुराने प्रकरण में नरेन्द्र कुशवाहा पुत्र कोमल सिंह, निवासी बन्दरौठा, जनपद विदिशा (मध्य प्रदेश), से यात्री कर अधिकारी द्वारा कथित रूप से मोटी रकम मांगे जाने का आरोप लगाया गया था। आरोप था कि कथित मांग से परेशान होकर वाहन मालिक इतना क्षुब्ध हो गया कि वह एक ऊंचे टावर पर चढ़ गया था। घटना के बाद मौके पर हड़कंप मच गया और काफी हो-हल्ला हुआ। वाहन मालिकों का दावा है कि इस घटना के चलते भी संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर विभाग की खूब किरकिरी हुई थी।
इन दोनों घटनाओं को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच होना आवश्यक है।
#यातायात प्रभारी ने संभाला मोर्चा#
NH-44 पर जाम की सूचना मिलते ही यातायात प्रभारी आलोक तिवारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित वाहन चालकों से बातचीत कर उन्हें काफी देर तक समझाया। इसके बाद वाहन चालकों ने जाम समाप्त किया और हाईवे पर यातायात व्यवस्था सामान्य हो सकी।
सवाल बड़ा है—कौन लगाएगा ‘कथित वसूली’ पर ब्रेक?
सोमवार की घटना और वाहन चालकों द्वारा बताए जा रहे पुराने मामलों ने यात्री कर विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि वाहन चालक नियम तोड़ते हैं तो चालान और विधिक कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन यदि चालान के भय को कथित वसूली के दबाव के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है तो यह उससे भी गंभीर मामला है।
अब सवाल यह है कि NH-44 पर सड़कों तक पहुंचे वाहन चालकों के आक्रोश और पुराने मामलों में लगाए गए गंभीर आरोपों की क्या उच्चस्तरीय जांच होगी? क्या परिवहन विभाग वाहन चालकों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराएगा और आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदारी तय करेगा, या फिर यह मामला भी विभागीय फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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