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जी2 के आदेश लागू करने का आरोप, कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार से मांगा इस्तीफा

नई दिल्ली, 05 अक्टूबर (वेब वार्ता)। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग करते हुए उन पर संविधान की भावना और उसके प्रावधानों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लिए इस्तेमाल किए गए ‘जी2’ के कथित गैरकानूनी आदेशों को लागू किया और इस वजह से वह देश के लिए बोझ बन गए हैं। हालांकि, ये आरोप कांग्रेस नेताओं की ओर से लगाए गए हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।

जयराम रमेश ने उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की हालिया टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है। उन्होंने कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार में नैतिकता बची है तो उन्हें तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।

मतदान के अधिकार को लेकर न्यायमूर्ति भुइयां की टिप्पणी

कांग्रेस का यह हमला न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने ऐसी किसी भी प्रक्रिया को मनमाना बताया था, जिसके कारण बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित हो जाएं।

राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, हैदराबाद के एक कार्यक्रम में न्यायमूर्ति भुइयां ने संविधान और मतदान के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि संविधान नागरिकों को दो वर्गों में विभाजित नहीं करता—एक ऐसा वर्ग जिसे मतदान का अधिकार प्राप्त हो और दूसरा जिससे यह अधिकार छीन लिया जाए।

उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रक्रिया के कारण लाखों नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित हो जाते हैं और उन्हें अपने ही देश में दूसरे दर्जे के नागरिक जैसा महसूस होता है, तो ऐसी प्रक्रिया संविधान के मूल ढांचे के विपरीत हो सकती है। न्यायमूर्ति भुइयां के अनुसार, ऐसी स्थिति को किसी भी तर्क के आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता।

ज्ञानेश कुमार पर गैरकानूनी तरीके से काम करने का आरोप

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की है। चव्हाण ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की शक्तियों से संबंधित संसद द्वारा बनाए गए कानून का उल्लंघन किया है।

उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की कथित लिखित आपत्तियों के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और सभी संवैधानिक प्रावधानों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

‘संविधान की भावना और प्रावधानों का उल्लंघन’

जयराम रमेश ने इससे पहले भी न्यायमूर्ति भुइयां की टिप्पणी का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त पर संविधान की भावना और उसके प्रावधानों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था।

उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद से जुड़ा हुआ है और इसे केवल सामान्य कानूनी अधिकार के रूप में नहीं देखा जा सकता। कांग्रेस का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का संतोषजनक समाधान चुनाव आयोग की ओर से किया जाना चाहिए।

कांग्रेस ने बढ़ाया दबाव

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस लगातार राजनीतिक दबाव बढ़ा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों और विभिन्न छात्र संगठनों की ओर से दिल्ली में विरोध प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं।

कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया, मतदाता अधिकार और चुनाव आयोग की जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को आगे भी उठाती रहेगी। दूसरी ओर, कांग्रेस के आरोपों पर चुनाव आयोग या मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से इस रिपोर्ट के समय तक कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।

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