राज्यउत्तर प्रदेशअन्नदाता को सियासी दावों के बजाय ठोस अमल...

अन्नदाता को सियासी दावों के बजाय ठोस अमल चाहिए- रोहित देवल

​मुरादाबाद,13 अक्टूबर । जनपद के डिलारी ब्लाक के सौंदपुर गांव में मंगलवार को आयोजित किसान महापंचायत में जिलाध्यक्ष रोहित देवल ने किसानों के लंबित मुद्दों को लेकर शासन-प्रशासन के साथ निजी मिल प्रबंधन को भी चेताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गन्ना बेचने के महीनों बाद भी किसान बकाया भुगतान के लिए टकटकी लगाए देखता रहता है, केवल इतना ही नहीं बल्कि विलंबित गन्ना ब्याज भुगतान लिए उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, कानूनी प्रक्रिया के तहत अड़ंगा लगा रखा है, जबकि यह रकम केवल आंकड़े नहीं बल्कि बच्चों की फीस, खाद-बीज और परिवार के इलाज का सहारा है। इसके साथ ही उन्होंने धान खरीद केंद्रों को तत्काल प्रभाव से सुचारू रूप से चालू करवाने और किसानों को समर्थन मूल्य पर पारदर्शी खरीद की गारंटी देने की मांग उठाई। महापंचायत में सी2+50 फीसदी फॉर्मूले पर एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, पेंशन-बीमा सुविधा, मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर रोक, बिजली के निजीकरण और बीज विधेयक 2025 को निरस्त करने तथा गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने जैसी प्रमुख मांगों पर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया गया।
​रोहित देवल ने सरकारी दावों पर निशाना साधते हुए कहा कि मंचों से किसान की आय कई गुना बढ़ाने की बातें की जाती हैं, लेकिन हकीकत में वेस्ट-यूपी का किसान बकाया गन्ना भुगतान और धान क्रय केंद्रों के चक्कर काटने को मजबूर है। किसान की आय भाषणों से नहीं बल्कि खेत की लागत और बैंक खाते में आने वाली वाजिब रकम से तय होती है। समय पर भुगतान न मिलने और धान खरीद केंद्रों की सुस्ती से गांव की पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिससे दुकानों पर उधार और खाद-बीज के लिए किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अव्यवस्थाओं का नुकसान हमेशा किसान ही क्यों उठाए? देवल ने गन्ना भुगतान की निगरानी व्यवस्था प्रभावी बनाने, धान खरीद केंद्रों पर बिना अड़चन तौल सुनिश्चित करने, बकाया भुगतान में देरी होने पर ब्याज सहित राहत देने और लंबित हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की। विकसित भारत 2047 के दावों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि किसान को भविष्य के सपनों के बजाय आज अपनी फसल की वाजिब और समयबद्ध कीमत चाहिए।
​महापंचायत के दौरान गढ़-तिगरी में कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले गंगा स्नान मेला राजकीय घोषित होने के बाद सरकार द्वारा जारी बजट में से श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर खर्च होने के बजाय अधिकांश धनराशि वीआईपी कल्चर पर खर्च होने पर भी चर्चा की गई। मेले के प्रति स्थानीय किसानों, व्यापारियों, दुकानदारों और श्रद्धालुओं की बढ़ती उदासीनता को मेला प्रबंधन की विफलता करार देते हुए गहरी चिंता जताई गई। इसके साथ ही मुरादाबाद, रामपुर और संभल क्षेत्र के लोगों से आस्था के इस मेले में बढ़-चढ़कर शामिल होने और पुण्य लाभ अर्जित करने का आह्वान किया गया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से मुरादाबाद के युवा जिलाध्यक्ष अरुण ठाकुर, युवा प्रदेश प्रवक्ता मुकर्रम चौधरी, ब्लाक अध्यक्ष भगतपुर हसन, उपाध्यक्ष अफरीदी भगतपुर तथा गजेंद्र चौधरी प्रदेश उपाध्यक्ष समेत तमाम पदाधिकारी व किसान उपस्थित रहे।

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