जांजगीर | राष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
Chhattisgarh Textbook Supply Delay को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ और निजी स्कूलों के शिक्षकों ने जांजगीर में पाठ्य पुस्तक निगम की कार्यप्रणाली के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया। निजी स्कूल संचालकों का आरोप है कि समय पर पाठ्य पुस्तकों की आपूर्ति नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो रायपुर में राज्य स्तरीय आंदोलन किया जाएगा।
- जांजगीर में निजी स्कूल संचालकों ने धरना-प्रदर्शन किया।
- समय पर पाठ्य पुस्तकों की आपूर्ति नहीं होने का आरोप।
- 21 जुलाई से पुस्तक वितरण की सूचना का विरोध।
- सत्र शुरू होने के बाद पुस्तकें मिलने से पढ़ाई प्रभावित होने की बात कही।
- सरकारी स्कूलों की तरह निजी स्कूलों को भी समय पर पुस्तकें उपलब्ध कराने की मांग।
- मांगें नहीं मानी गईं तो रायपुर में राज्य स्तरीय आंदोलन की चेतावनी।
Chhattisgarh Textbook Supply Delay को लेकर क्यों बढ़ा विरोध?
छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ का कहना है कि पिछले कई वर्षों से निजी स्कूलों को समय पर पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। इस वर्ष भी निजी विद्यालयों को 21 जुलाई से पुस्तकें उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है, जबकि तब तक शैक्षणिक सत्र काफी आगे बढ़ चुका होगा।
संघ का कहना है कि देर से पुस्तकें मिलने का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ता है। इसलिए समयबद्ध वितरण व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
धरना-प्रदर्शन से जुड़े प्रमुख तथ्य
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| स्थान | जांजगीर-चाम्पा, छत्तीसगढ़ |
| विरोध करने वाले | अशासकीय विद्यालय संचालक संघ एवं निजी स्कूल शिक्षक |
| मुख्य मुद्दा | पाठ्य पुस्तकों की आपूर्ति में देरी |
| वर्तमान स्थिति | 21 जुलाई से पुस्तक वितरण की सूचना |
| मुख्य मांग | सत्र शुरू होते ही समय पर पुस्तक वितरण |
| आंदोलन की चेतावनी | समाधान नहीं होने पर रायपुर में राज्य स्तरीय आंदोलन |
डीईओ ने क्या कहा?
जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) अशोक सिन्हा ने कहा कि निजी स्कूल संचालकों की मांगों से उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। उन्होंने बताया कि आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भी भेजा गया है और विभाग स्तर पर इस संबंध में आगे की प्रक्रिया जारी है।
हालांकि, निजी विद्यालय संचालकों का कहना है कि पिछले वर्ष भी इसी समस्या को लेकर ज्ञापन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।
समय पर पुस्तक वितरण की मांग दोहराई
संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों को भी सरकारी स्कूलों की तरह समय पर पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएं। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक कदम है।
फिलहाल निजी स्कूल संचालक प्रशासन की ओर से सकारात्मक निर्णय का इंतजार कर रहे हैं, जबकि शिक्षा विभाग ने मांगों को उच्च स्तर पर भेजने की पुष्टि की है।




