फुलर्टन (अमेरिका) | खेल डेस्क | वेब वार्ता
US Open Super 300 Badminton में भारत के अनुभवी शटलर किदांबी श्रीकांत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष एकल के फाइनल में प्रवेश कर लिया है। शनिवार को खेले गए सेमीफाइनल में श्रीकांत ने जापान के युदाई ओकिमोतो को 72 मिनट तक चले रोमांचक मुकाबले में 22-20, 15-21, 21-19 से हराया। इस जीत के साथ उन्होंने मौजूदा सत्र के अपने पहले फाइनल में जगह बनाई, जहां उनका सामना चीनी ताइपे के सु ली यांग से होगा।
- किदांबी श्रीकांत ने अमेरिकी ओपन सुपर 300 के फाइनल में जगह बनाई।
- सेमीफाइनल में जापान के युदाई ओकिमोतो को 22-20, 15-21, 21-19 से हराया।
- मुकाबला 72 मिनट तक चला।
- फाइनल में श्रीकांत का सामना चीनी ताइपे के सु ली यांग से होगा।
- रौनक चौहान का सफर सेमीफाइनल में समाप्त हुआ।
- महिला एकल में देविका सिहाग भी अंतिम चार में हारकर बाहर हुईं।
US Open Super 300 Badminton में श्रीकांत ने कैसे दर्ज की जीत?
विश्व रैंकिंग में 38वें स्थान पर काबिज किदांबी श्रीकांत ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। पहला गेम बेहद करीबी रहा, जिसे उन्होंने 22-20 से अपने नाम किया। दूसरे गेम में जापान के युदाई ओकिमोतो ने वापसी करते हुए 21-15 से जीत दर्ज कर मुकाबला बराबरी पर ला दिया।
निर्णायक तीसरे गेम में दोनों खिलाड़ियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली, लेकिन महत्वपूर्ण अंकों पर संयम बनाए रखते हुए श्रीकांत ने 21-19 से गेम और मैच जीतकर फाइनल का टिकट हासिल कर लिया।
सेमीफाइनल मुकाबले का स्कोर
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| टूर्नामेंट | US Open Super 300 Badminton |
| सेमीफाइनल | किदांबी श्रीकांत बनाम युदाई ओकिमोतो |
| स्कोर | 22-20, 15-21, 21-19 |
| मुकाबले की अवधि | 72 मिनट |
| फाइनल प्रतिद्वंद्वी | सु ली यांग (चीनी ताइपे) |
रौनक चौहान और देविका सिहाग का अभियान समाप्त
भारत के युवा शटलर रौनक चौहान का शानदार अभियान पुरुष एकल सेमीफाइनल में समाप्त हो गया। उन्हें चीनी ताइपे के सु ली यांग ने सीधे गेमों में 21-17, 21-19 से हराया।
वहीं महिला एकल वर्ग में छठी वरीयता प्राप्त देविका सिहाग को डेनमार्क की दूसरी वरीयता प्राप्त लाइन क्रिस्टोफरसन के खिलाफ 21-15, 11-21, 15-21 से हार का सामना करना पड़ा।
भारतीय खिलाड़ियों से बढ़ीं उम्मीदें
किदांबी श्रीकांत का फाइनल में पहुंचना भारतीय बैडमिंटन के लिए सकारात्मक संकेत है। अनुभवी खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने दबाव में शानदार प्रदर्शन किया और साबित किया कि वह अभी भी बड़े मंच पर मुकाबले जीतने की क्षमता रखते हैं।
यदि श्रीकांत फाइनल में जीत दर्ज करते हैं तो यह उनके आत्मविश्वास के साथ-साथ भारतीय बैडमिंटन के लिए भी बड़ी उपलब्धि होगी।




