भुवनेश्वर | राष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
Samvidhan Hatya Diwas 2026 के अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल (Emergency) को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का “काला अध्याय” बताया। सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल ने संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों को गंभीर चुनौती दी थी। उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र अंततः मजबूत होकर उभरा और जनता की जागरूकता ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की।
- संविधान हत्या दिवस पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का संदेश।
- आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताया।
- लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों पर टिप्पणी की।
- भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और जनता की जागरूकता की सराहना की।
- लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वालों को श्रद्धांजलि दी।
- लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाए रखने का आह्वान किया।
Samvidhan Hatya Diwas 2026 पर धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संदेश में कहा कि वर्ष 1975 में लगाया गया आपातकाल भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का ऐसा दौर था, जिसे देश कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने इसे संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चुनौतीपूर्ण समय बताते हुए कहा कि उस अवधि से देश ने महत्वपूर्ण सीख प्राप्त की।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता में निहित होती है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती देश की सबसे बड़ी ताकत है।
लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों पर दिया जोर
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उस समय लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रभाव पड़ा था। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उसने कठिन परिस्थितियों का भी सफलतापूर्वक सामना किया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की आवाज को स्थायी रूप से दबाया नहीं जा सकता और भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था ने समय-समय पर अपनी मजबूती साबित की है।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अवसर | संविधान हत्या दिवस |
| वक्ता | केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान |
| मुख्य विषय | 1975 का आपातकाल एवं लोकतंत्र |
| मुख्य संदेश | लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और नागरिक जागरूकता |
लोकतंत्र की रक्षा करने वालों को दी श्रद्धांजलि
केंद्रीय मंत्री ने उन सभी लोगों के साहस, त्याग और समर्पण को नमन किया जिन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने देशवासियों से लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखने और संविधान के मूल्यों को आगे बढ़ाने का भी आह्वान किया।
लोकतांत्रिक मूल्यों पर लगातार बनी हुई है चर्चा
आपातकाल भारतीय राजनीतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है, जिस पर समय-समय पर विभिन्न दृष्टिकोण सामने आते रहे हैं। शिक्षा, लोकतंत्र और संविधान से जुड़े विमर्श में यह विषय आज भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस संदेश के साथ एक बार फिर लोकतंत्र, नागरिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज होने की संभावना है।




