राष्ट्रीयLok Sabha Defection Cases: मानसून सत्र से पहले...

Lok Sabha Defection Cases: मानसून सत्र से पहले बागी तृणमूल और शिवसेना (उबाठा) सांसदों पर फैसला संभव

नई दिल्ली | राजनीतिक डेस्क | वेब वार्ता

Lok Sabha Defection Cases को लेकर संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले बड़ा फैसला सामने आ सकता है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के बागी सांसदों की सदस्यता एवं मान्यता से जुड़े मामलों पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार अब कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञों की राय लेने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके बाद केंद्रीय विधि मंत्रालय से परामर्श लेकर निर्णय लिया जा सकता है, ताकि भविष्य में किसी न्यायिक चुनौती की स्थिति में फैसला कानूनी रूप से मजबूत रहे।

⚡ संक्षिप्त वार्ता (Quick Info)

  • मानसून सत्र से पहले बागी सांसदों पर फैसला संभव।
  • लोकसभा अध्यक्ष सभी पक्षों की दलीलें सुन चुके हैं।
  • कानूनी एवं संवैधानिक विशेषज्ञों से राय ली जा रही है।
  • टीएमसी ने 20 बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है।
  • शिवसेना (उबाठा) ने 6 सांसदों को अलग गुट की मान्यता न देने की मांग की।
  • अंतिम निर्णय से पहले विधि मंत्रालय से भी परामर्श लिया जा सकता है।

Lok Sabha Defection Cases में क्या है पूरा मामला?

लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष दो अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े सदस्यता विवाद विचाराधीन हैं। तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी छोड़ने वाले सांसदों के खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग की है। वहीं शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने भी अपने पूर्व सांसदों को अलग गुट के रूप में मान्यता नहीं देने का अनुरोध किया है।

सूत्रों के अनुसार दोनों मामलों में सभी पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं और अब संवैधानिक पहलुओं का परीक्षण किया जा रहा है।

निर्णय से पहले कानूनी राय क्यों ली जा रही है?सदस्यता और दलबदल से जुड़े मामलों में संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) तथा न्यायालयों के पूर्व निर्णयों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है। इसलिए अंतिम फैसला देने से पहले कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञों के साथ-साथ विधि मंत्रालय की राय भी ली जा रही है।

तृणमूल कांग्रेस की क्या मांग है?

तृणमूल कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष को याचिका सौंपकर पार्टी से अलग हुए 20 सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि इन सांसदों ने दल छोड़कर दूसरे राजनीतिक दल के साथ जाने का निर्णय लिया है।

सूत्रों के मुताबिक, इन सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय का निर्णय लिया है, जिसे लेकर सदस्यता विवाद उत्पन्न हुआ है।

पार्टीविवादमांग
तृणमूल कांग्रेस (TMC)20 बागी सांसदअयोग्यता घोषित करने की मांग
शिवसेना (उबाठा)6 सांसदों का दल परिवर्तनअलग गुट की मान्यता न देने की मांग

शिवसेना (उबाठा) का क्या पक्ष है?

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेताओं ने भी लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर छह सांसदों को अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता नहीं देने का अनुरोध किया है। ये सांसद हाल ही में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए हैं।

पार्टी का कहना है कि दलबदल से जुड़े मामलों का निर्णय संविधान और संसद के नियमों के अनुरूप किया जाना चाहिए।

मानसून सत्र पर इसका क्या असर पड़ सकता है?यदि मानसून सत्र शुरू होने से पहले इन मामलों में निर्णय आता है, तो संबंधित सांसदों की संसदीय स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। हालांकि अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष के आदेश और उसके बाद संभावित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

फैसले पर टिकी राजनीतिक नजरें

संसद के मानसून सत्र से पहले इन मामलों पर संभावित निर्णय को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दलबदल कानून से जुड़े मामलों में लोकसभा अध्यक्ष का फैसला संसदीय प्रक्रिया और संबंधित दलों की राजनीतिक रणनीति दोनों पर प्रभाव डाल सकता है।

फिलहाल सभी पक्ष अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। अध्यक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -

More articles

- Advertisement -
- Advertisement -